न चुभेंगे पत्थर, न ही जलेंगे पैर…

भोपाल-यह कहानी है उर्मिला बैगा जैसे कई तेन्दूपत्ता संग्राहक की, जिनको तेन्दूपत्ता तोड़ते समय चिलचिलाती धूप में पैरों के जलने, नुकीले पत्थर, गिट्टी और कांटे चुभने से तकलीफ बढ़ जाती थी। अब इन तेन्दूपत्ता संग्राहकों के न तो पैर जलेंगे और न ही कांटे चुभेंगे। साथ ही वे भरी दोपहरी में प्यास लगने पर शीतल जल उनके पास ही होगा।

यह सब संभव हो सका है मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान के संवेदनशील मन से। मुख्यमंत्री ने तेन्दूपत्ता सग्राहकों के लिये चरण-पादुका योजना बनाई। उनके मन में हमेशा एक आम व्यक्ति की भलाई की चिंता रहती है। वो दरिद्र नारायण के बारे में ही सोचते हैं।

हुआ यूँ िक सीधी जिले की कुसमी तहसील की वन समिति की महिला तेन्दूपत्ता संग्राहक उर्मिला बैगा को हाल ही में तहसील टंसार में हुए सम्मेलन में मुख्यमंत्री  चौहान ने चरण-पादुका योजना में अपने हाथों से चप्पल पहनाई। उर्मिला इस एहसास से भाव-विभोर हो गई कि प्रदेश का मुखिया उसे अपने हाथों से चप्पल पहना रहे हैं। उर्मिला ने मन ही मन मुख्यमंत्री को लाखों दुआएँ दी। अब उर्मिला और उसके अन्य साथी श्रमिक महुआ बिनने और तेन्दूपत्ता संग्रहण का काम धूप, कंकड़-पत्थर की चिंता किये बगैर अच्छे तरीके से कर सकेंगे।

उर्मिला को मुख्यमंत्री ने साड़ी और पानी को ठंडा रखने के लिये बॉटल भी दी। उर्मिला छोटी-छोटी जरूरत की चीज पाकर बहुत खुश है। उसका मानना है कि अब जंगल में पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उर्मिला की तरह ही अन्य लाखों तेन्दूपत्ता संग्राहक मुख्यमंत्री की सराहना करते नहीं थक रहे हैं।

सीधे जिले के 62 हजार तेन्दूपत्ता संग्राहक पुरुष और 62 हजार महिलाओं को चरण-पादुका योजना का लाभ दिया जा रहा है। विगत 19 अप्रैल को मुख्यमंत्री चौहान ने चरण-पादुका योजना शुरू की। इसमें तेन्दूपत्ता संग्राहक को एक जोड़ जूते और महिलाओं को एक जोड़ी चप्पल और साड़ी तथा दोनों को पानी की एक-एक बॉटल दी जा रही है।