दमोह की भैंस दुग्ध उत्पादन में पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर 

दमोह- राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना गोपाल पुरुस्कार योजना दुधारु पशु पालन को बढावा देने के लिये बहुत अच्छी योजना है। पूर्व में वर्ष 2012 में हल्लू यादव की गाय ने प्रदेश में तीसरा प्राप्त किया, इस वर्ष देवेन्द्र असाटी की भैंस ने दूसरा स्थान प्रदेश में पाकर दमोह जिले का नाम रोशन किया। इस आशय की बात कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने कही।
उन्होंने कहा शासन की गोपाल पुरुस्कार योजना के अन्तर्गत गाय/भैंस में दुग्ध उत्पादन के प्रतियोगिता नवम्बर माह में पूरे प्रदेश में प्रत्येक विकासखण्ड स्तर से प्रदेश स्तर तक आयोजित की गयी थी जिसमें दमोह जिले के प्रगतिशील पशु पालक देवेन्द्र असाटी, निवासी असाटी वार्ड दमोह की मुर्रा भैंस ने विकासखण्ड स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर 10 हजार रुपये तथा जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर 50 हजार रुपये तथा प्रदेश स्तर पर 19.866 लीटर प्रतिदिन दूध देकर द्वितीय स्थान प्राप्त कर एक लाख रुपये का नगद पुरुस्कार प्राप्त किया। कुल 1 लाख 60 हजार रुपये की नगद राशि का ईनाम प्राप्त किया।
देवेन्द्र असाटी वर्ष 1978 से पशुपालन का व्यवसाय करते आ रहे हैं तथा उनकी डेयरी में 28 भैंसे, 06 गायें हैं जो लगभग 08 से 19 लीटर दूध प्रतिदिन देती है। जिला स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में वित्त मंत्री जयन्त मलैया तथा सांसद प्रहलाद पटेल ने इनके पशु का दुग्ध उत्पादन देखकर सराहना की तथा 50 हजार रुपये नगद व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया है। इनकी डेयरी से सुबह-शाम दूध की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण एक घंटे के भीतर ग्राहक लाइन लगाकर 60 रुपये प्रतिलीटर नगद खरीद रहे हैं। उनका कहना है सफल डेयरी के लिए आवश्यक है कि स्वयं पशुओं की देखरेख करें, स्वयं दुग्ध दोहन करें तथा उनका रख रखाव व समय पर टीकाकरण व थनैला रोग से बचाव व गाय/भैंसों की सही गर्मी पर गर्भाधान व पशु चिकित्सक का तकनीकी मार्गदर्शन से यह सफलता हासिल की।
उपसंचालक पशु चकित्सा कहते हैं पशु पालन एक लाभकारी धंधा है, बशर्ते पशुपालक अपने पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान कराकर उनसे उत्पन्न वत्सों को बढाकर गाय, भैंस बनाकर तैयार करें, तथा उनको वर्षभर हरी घास उपलब्ध कराने हेतु बहुवर्षीय चारा लगायें, पशुओं को संतुलित आहार व मिनिरल मिक्चर देना व पशु चिकित्सक से समय पर तकनीकी मार्गदर्शन लेकर अच्छा लाभ कमा सकते हैं, जो पशु पालक डेयरी व्यवसाय से जुंडना चाहते हैं वे विभाग की आचार्य विद्यासागर योजना के अनुदान का लाभ लेकर 05 से 10 दुधारु पशुओं की डेयरी शुरु कर सकते हैं।इसी संबंध में अध्यक्ष गोपाल पुरूस्कार योजना एवं सीईओ जिला पंचायत एच.एस.मीना कहते हैं, कृषि के साथ साथ पशुपालन बहुत ही आवश्यक है, सूखे की स्थिति या अन्य परिस्थितियों में कृषि में आमदनी कम होने पर पशुपालन कृषकों को स्थायी आमदनी का साधन है, कृषक अपनी कृषि के साथ साथ डेयरी, बकरी,सूकर,कुक्कुट पालन करें व शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करें।