कहाँ जान जोखिम में डाल कर बच्चे स्कूल आते है ताकि वे पढ़ सकें

 सिंगरौली-सरकार शिक्षा को लेकर कितना भी गंभीर क्यों न हो मगर जमीनी हकीकत से हमेशा दूर ही रहती है । इस सत्र में बच्चों शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए मध्यप्रदेश के उर्जान्चल नगरी सिंगरौली, सोनभद्र में प्रशासन ने एक नया स्लोगन दिया “सोन पढ़ेगा, सोन बढ़ेगा” । अब यही स्लोगन प्रशासन के लिए मुसीबत बन गयी है । बरसात में भारी बरसात के कारण सोन नदी में जलस्तर बढ़ा हुआ है और ऐसे में बच्चों को पढ़ने के लिए नदी पार कर स्कूल आना पड़ता है । मगर प्रशासन द्वारा दिये गए स्लोगन पर गौर करें तो सोन नदी यदि बढ़ी तो आखिर बच्चे कैसे बढ़ेंगे । हालांकि प्रशासन पुल बनवाने की बात कह रहा है

कभी – कभी अपना ही दांव कैसे उल्टा पड़ जाता है यह आज हम आपको बताएंगे । शिक्षा को जागरूक करने के लिए प्रशासन द्वारा इस बार एक नया नारा दिया गया था “सोन पढ़ेगा, सोन बढ़ेगा” । इसी नारे के साथ स्कूल चलो अभियान भी धूमधाम से निकाला गया था । मगर बरसात में यही नारा अब प्रशासन को चुभने लगा है । बरसात में भारी वर्षा के कारण

नदी नाले उफान पर हैं । ऐसे में उर्जान्चल नगरी की सोन नदी में बढ़ी हुई है । नदी बढ़ने से जुगैल क्षेत्र के कई गांव के बच्चों को नदी पार कर जान जोखिम में डालकर स्कूल आना-जाना पड़ता है । इस नदी में कई बार घटनाये भी घट चुकी हैं मगर आज तक समस्या का हल नहीं निकल सका । बच्चे पढ़ना चाहते हैं, कुछ बनना चाहते हैं इसलिए जान जोखिम में डालकर स्कूल आते व जाते हैं । बच्चों का कहना है कि नदी पार करने में बहुत डर लगता है और कपड़े भी भीग जाते हैं । जिसके वजह से उन्हें देर हो जाती है और उसके लिए स्कूल में डांट भी खानी पड़ती है ।

रिपोर्ट
देवेंद्र पाण्डेय
सिंगरौली