प्राचार्य ने रजिस्टर छुपाकर अतिथि विद्वानों पर लगाया चोरी का इल्जाम,

एफआईआर की दी धमकी

पथरिया। शासकीय महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ बाबूलाल अहिरवार की अतिथि विद्वानों को परेशान करने की नियत से की जा रही कारगुजारी थम नहीं रही है इस प्रकार के कार्य करने पर न तो उनपर शासन ही ध्यान दे रहा है और उच्च अधिकारी मूकदर्शक बने हुए है। शनिवार को अतिथि विद्वान कक्षायें लेने के बाद जब वह स्टाफ रूम में अपने उपस्थित रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने गये तो वहाँ रजिस्टर न पाकर प्राचार्य से कहा। प्राचार्य ने टेबल पर फाइलों को यहां वहाँ कर रजिस्टर को खोजा और जब नहीं मिला तो आगबबूला हो गये और उपस्थित अतिथि विथद्वानों को खरी खोटी सुना डाली। इतना ही नहीं  उन्होंने बेइज्जत कर उन्हें रजिस्टर न मिलने तक महाविद्यालय न छोड़ने की चेतावनी दी उन्होंने रजिस्टर चोरी का इल्जाम लगाते हुए नामजद एफआईआर करने की धमकी तक दे डाली। अपनी सार्वजनिक रूप से बेइज्जती से आहत अतिथि विद्वानों ने प्राचार्य से कहा कि हम लोग यहाँ पढाने आते है चोरी करने नहीं, कहीं रखा होगा आप शांति से खोजबीन कर लीजिए लेकिन उन्होंने एक न सुनी और बो अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल कर अतिथि विद्वानों को लज्जित करते रहे इस दौरान महिला अतिथि विद्वान भी उपस्थित थी। बाद में जब माहौल बहुत गरम हो गया तो स्टाफ ने ही कहा कि आप अपनी अलमारी में देख लीजिए हो सकता है फाइलों में दब के चला गया हो और जब अलमारी खोली तो रजिस्टर फाइलों के बीच में रखा था। रजिस्टर मिलने के बाद भी प्राचार्य के मन में पश्चाताप के भाव नहीं थे इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि अतिथि विद्वानों को परेशान और लज्जित करने का उनका यह षडयंत्र था। इस घटना के पहले भी वह शासन के नियमों को ताक पर रखके अतिथि विद्वानों को परेशान करने की नियत से तुगलकी फरमान जारी कर चुके है चाहे वह बायोमीट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाने का मामला हो और चाहे चार घंटे तक महाविद्यालय मे जबरन रोकने का आदेश हो। हालांकि बाद में उन्हें उच्च अधिकारियों की फटकार लगी और उन्हें अपने सभी तुगलकी फरमान मौखिक रूप से वापिस लेने पडे। रजिस्टर चोरी की घटना को इन दो घटनाओं से आहत प्रभारी बाबूलाल अहिरवार के बदले की भावना से रचे गये षडयंत्र के रूप में देखा जा रहा है।