Victim suffering for justice

न्याय के लिए भटकती पीडिता

  उमरिया जिले के मानपुर थाने के ग्राम बिजौरी में उप सरपंच के दंश के शिकार लोग भटक रहे हैं न्याय के लिए, पुलिस नहीं सुन रही है फ़रियाद, पीड़ितों ने लगाया आरोप उप सरपंच से पैसे लेकर पुलिस नहीं करती कार्यवाही, जिले के एस पी से लेकर आई जी तक कर रहे हैं फरियाद |

  उमरिया जिले के मानपुर में मचा है जंगल राज, मामला है ग्राम पंचायत बिजौरी का, ग्राम पंचायत बिजौरी का बाहुबली उप सरपंच अंशधारी यादव गाँव में बना है आतंक का पर्याय, चाहे किसी के घर में घुस कर किसी की बहन बेटी की ईज्जत से खिलवाड़ करे या दुष्कर्म करे उसके खिलाफ थाने में नहीं लिखी जाती रिपोर्ट ऐसा ही मामला जिले के एस पी के पास आया तीन फरियादी आये अपनी फ़रियाद लेकर जिसमें पहली उप सरपंच के द्वारा किये गए बलात्कार की शिकार आदिवासी बैगा महिला ननबुदिया बाई का कहना है कि 26 27 अगस्त की दरम्यानी रात उप सरपंच अंशधारी यादव लगभग 2 बजे रात घर आया और मेरे को उठाया और कहा कि मैं अंशधारी हूँ तब मैं बोली कि यहाँ क्यों आये हो तब कहा कि हल्ला न कर नहीं तो मैं काट कर रख दूंगा, और मेरे को आँगन से उठा कर परछी में ले जाकर मेरे साथ जबरन गलत काम किया, मैं सुबह रिपोर्ट करने मानपुर थाने गई तो मेरे को पैसा देकर भगा दिए और कहे कि तुम्हारी सब कार्यवाही हो जायेगी और वो गाँव के पंचों को लाकर कह दिया कि रामायण हो रही थी मैं कुछ नहीं जानता और आज तक कोई कार्यवाही नही हुई, मानपुर थाने से मैडम जी भगा दीं फिर मैं घर आ गई, मैं एस पी साहब, कलेक्टर साहब के पास गई कहीं सुनवाई नहीं हो रही है शहडोल भी आई जी साहब के पास गई वो कहे कि जांच होगी लेकिन कुछ नहीं हुआ 26 27 तारीख से लगातार दौड़ रही हूँ लेकिन कोई सुनाने वाला नहीं है |

  वहीं दूसरे फरियादी जगदीश प्रसाद का कहना है कि मेरे को लकड़ी काटने के लिए पिछले साल बुलाया और कहा कि लकड़ी काट दो मेरे बेटी की शादी है और मेरे से लकड़ी कटवाया उसी दौरान मैं गिर गया और बेहोश हो गया, मेरे को जबलपुर ले गए ये सब खर्च देने को कह दिया, मैं थाने में रिपोर्ट डाला कोई कार्यवाही नहीं हुई, साल भर हो गया, एस पी के पास गया, कलेक्टर के पास गया थाना भी गया कुछ सुनवाई नहीं हो रहा है पैसे वाला पार्टी है उप सरपंच है सीधे धमकी देता है |

   तीसरे पीड़ित राम प्रसाद का कहना है कि अंशधारी यादव हमारे घर पाईप माँगने के बहाने आया और हमारी माँ का हाथ पकड़ कर खींचने लगा, तो हमारी माँ चिल्लाई तो हमारी भतीजी दौड़ी तो गलत तो नहीं कर पाया लेकिन छेड़ छाड़ तो किया ही, मानपुर थाने में रिपोर्ट करवाए तो वहां के जो टी आई साहब थे उनको 1 लाख 20 हजार रुपये भर दिया जबकि मैं गवाह भी दिया तो कह दिए कि सब झूठा है, कागज़ में दस्तखत करवा लेते हैं और कह देते हैं कार्यवाही हो जायेगी और कुछ होता नहीं है 24/02/2016 की घटना है, हम न्यायालय गए वहां से वारंट थाने में गया लेकिन गायब हो गया, ऐसे ही मेरे अगल बगल वालों के साथ दो चार घटना कर चुका है उप सरपंच है पैसा दे देता है, झूठा बता देता है कि हम यहाँ थे और वाही लोग किसी के घर में घुस कर किसी की बेटी पकड़ेगा किसी के साथ कुछ करेगा और पैसे के दम पर कोई कुछ नहीं करता है, मानपुर थाना हो या कोई हो कुछ नहीं करता है, आज उस विधवा को कोई देखने वाला नहीं है उसके साथ 376 कर दिया गया आई जी के पास गई, एस पी साहब के पास गई सब कह देते हैं कि हो जायेगा लेकिन कोई कुछ नहीं करता है जबकि 24 घंटे के भीतर कार्यवाही हो जाना चाहिए, आज वो मर जाय तो कोई सुनने वाला नहीं है गरीबों की मदद के लिए सरकार होती है लेकिन यहाँ ऐसा नहीं है |

   इस मामले में जब जिले के एस पी डाक्टर असित यादव से बात किया गया तो उनका कहना है कि अभी हमने थाना प्रभारी से इस पूरे प्रकरण में जानकारी लिया है, ये पूरा मैटर है वहां के जो सरपंच और उप सरपंच हैं उनके आपसी रंजिश का मामला बताया गया है, गांव के जो सुखनिधान सिंह हैं वो महिलाओं से शिकायत करवाते रहते हैं, उस महिला ने शायद पूर्व में भी इस तरह की शिकायत की है, अभी हमने उसको जांच में रख लिया है पूरे आस पास के क्षेत्रों से जांच कराएँगे, वीडियो रिकार्डिंग कराएँगे, अगर तथ्य सामने आते हैं तो कार्यवाही होगी |

   गौरतलब है आई पी सी और सी आर पी सी में कहीं भी आवेदन को जांच में रखने का प्रावधान नहीं, पुलिस मुख्यालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि जो भी पीड़ित आता है उसकी रिपोर्ट तत्काल लिखी जाय और पीड़ित के साथ सह्रदयता पूर्वक व्यवहार किया जाय लेकिन मानपुर थाने में तो मुख्य मंत्री से लेकर पुलिस महानिदेशक तक के निर्देश बाहुबली उप सरपंच के कारण बेअसर नजर आ रहे हैं जबकि बलात्कार जैसे मामले में तत्काल एफ आई  आर होनी चाहिए लेकिन आदिवासी बैगा पीडिता अपने साथ हुए दुष्कर्म को हर जगह सुनाती फिर रही है और कोई फरियाद सुनाने वाला नहीं है जबकि बैगा जन जाति को राष्ट्रीय मानव का दर्जा दिया गया है | 

                                        सुरेन्द्र त्रिपाठी

                                          उमरिया