सरकार की संस्थागत प्रसव व्यवस्था यहां एक सफेद हाथी बनी हुई है ? प्रसव पीड़ा से कई घंटों तड़पती महिलाएं

एक सिविल अस्पताल एवं दो पीएससी में सीबीएमओ सहित पांच डाक्टर

दमोह हटा-सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का अंदाजा केवल इस आंकड़ों से लगाया जा सकता है कि नगर के सिविल अस्पताल से 141 दिन में 427 महिलाएं प्रसव पीड़ा से कराहती हुई दमोह रिफर की गई। सरकार की संस्थागत प्रसव व्यवस्था यहां एक सफेद हाथी बनी हुई है। नगर के समस्त महत्वपूर्ण पदों पर महिला जनप्रतिनिधि विराजमान है, महिला अधिकारियों की संख्या की बड़ी है लेकिन दुर्भाग्य यह है कि महिलाओं को होने वाली पीड़ा व कराहने की आवाज इनके कानों तक नहीं पहंुच पा रही है। आंकड़े बताते है कि षिक्षा एवं जागरूकता के आभाव में क्षेत्र की 80 प्रतिषत महिलाओं में खून की कमी है, जिसके कारण कई रोग महिलाओं को अपने जाल में ले रहे है।

                विगत तीन दषक से नगर में कोई महिला रोग विषेषज्ञ नहीं है। विगत दो वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री की मंषानुसार गांव गांव में महिला स्वास्थ्य षिविर आयोजित किये गये थे जिसमें हर गांव में करीब चार से पांच महिलाएं ऐसी मिली थी जिनकी बच्चादानी का आपरेषन अति आवष्यक है लेकिन गरीबी और पिछड़ापन के कारण महिलाएं अपने दर्द को छिपायें हुए है। संभवतः इस संबंध में सारे आंकड़े स्वास्थ्य विभाग में भी दर्ज है।

                गर्भवती महिलाओं का पंजीयन करके प्रसव के दौरान प्रसूता को पास के अस्पताल बुला लिया जाता है लेकिन संस्थागत प्रसव में आषा कार्यकर्ता, एएनएम एवं स्टाफनर्स ही उनकी डिलेवरी करा रही है। हटा सिविल अस्पताल, रनेह एवं हिनौता प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में सीबीएमओ सहित मात्र पांच डाक्टर पदस्थ्य है, एक एक डाक्टर को 12 से 18 घंटा तक डिय्टी करना पड़ रही है। नगर के अस्पताल को दस साल पहले सिविल अस्पताल का दर्जा मिला लेकिन यहां न तो 60 बिस्तर लग पाये न ही कोई सुविधा मिल पाई के कागजों पर ही सिविल अस्पताल का नाम चल रहा है। आंकडे बताते है कि मार्च में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत हो गई थी। वहीं अप्रेल माह में चार षिषु व मई माह में दो षिषु मृत पैदा हुए थे। एक सप्ताह पुूर्व ही खमरगौर की एक गर्भवती महिला की मौत हो गई थी, जिसे मीडिया से भी छिपाया गया और बताया गया कि मृत अवस्था में ही महिला हटा अस्पताल आई थी। इसके अलावा अप्रेल माह में 17 षिषु कम वजन के पैदा हुए थे इसी तरह मई माह में 19 एवं जून माह में 22 षिषु कम वजन के पैदा हुए थे। जिनमें से 23 बच्चों को इलाज के लिए दमोह रिफर किया गया था। ये सारे षिषु पीलिया, कम वजन, इन्फेक्षन आदि से ग्रस्त थे। पहले इन्हे एनबीएसयू यूनिट में रखा गया जहां स्थिति कन्ट्रोल न होने के कारण उन्हे रिफर कर दिया गया। एनबीएसयू में इन षिषुओं को इलाज चार्ट में अंकित प्रोटोकाल के अनुसार होता है। इसके लिए एएनएम एवं स्टाप नर्स को प्रषिक्षित किया गया है। वे ही इस वार्ड की प्रभारी रहती है।

 न तो यहां महिला रोग विषेषज्ञ है न ही शिशु रोग विषेषज्ञ है। यह वेदना जब आज नगर की जागरूक महिलाओं के समक्ष रखा तो सभी के विचार अलग अलग नजर आये।

                विधायक उमादेवी खटीक से जब इस संबंध में बात करनी चाही तो उन्होने फोन रिसीव करना भी उचित नही समझा वही उन्हे पीए सुरेष पटेल ने बताया कि मैडम अभी क्षेत्र के भ्रमण पर गई हुई है।

                समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही भारती साहू, शिल्पा खुराना, याषमीन खान, रजनी पटैल, मनीषा साहू, मालती, माधुरी पटेल ने बताया कि हटा अनुविभाग में स्वास्थ्य सुविधा नगण्य है, जो है वे केवल कागजी है। महिलाओं से संबंधित मामूली सी बीमारी के लिए लोगों को दमोह, जबलपुर, सागर, नागपुर भागना पड़ता है। महिला समाजसेवियों ने कहा कि जब घर से ही प्रसव पीड़ा से कहरती महिला अस्पताल आती है, जहां से उसे दमोह रिफर कर दिया जाता है, दमोह रिफर करने में वाहन के आने, दमोह जाने एवं दमोह में डिलेवरी होने तक करीब तीन से चार घंटे का समय लग जाता है, इस दौरान महिलाओं को होने वाले दर्द को आज तक शासन प्रषासन के लोगों ने नहीं समझा। यदि सारी सुविधा हटा में हो जाये तो महिलाएं इस कष्ट से बच सकती है।

                कांग्रेस नेत्री अनीता दिलीप खटीक ने बताया कि यह दुर्भाग्य है कि विधानसभा में दस साल से महिला विधायक है, जो गरीब की दहलीज से वोट लेकर चुनी गई लेकिन अब उनका सारा ध्यान गरीबों के घर से हटकर केवल निर्माण कार्याे एवं परिवारवाद में लगा हुआ है, राषन दुकान, मध्यान्ह भोजन से लेकर सब पर उनके परिवार का हस्तक्षेप है लेकिन जरूरतमंदों को न तो स्वास्थ्य सुविधा मिल रही है न ही शुद्ध पेयजल न ही उचित षिक्षा रोटी कपड़ा मकान के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है।

                जनपद पंचायत अध्यक्ष अनुष्का राय, नगर पालिका अध्यक्ष अरूणा तंतुवाय एवं कृषि उपज मंडी अध्यक्ष तारारानी खटीक ने बताया कि सरकार के द्वारा योजनाएं तो बना दी जाती है, लेकिन इन योजनाओं को संचालन कैसे हो या कैसे चल रही है इसकी कभी मानीटिरिंग नहीं की जाती है। प्रसव के दौरान कई षिषुओं की मौत हो रही है, स्वास्थ्य विभाग वास्तविक आंकड़े नहीं बताते है। षिषुओं को कुपोषण जकड़े हुए है, जहां प्रतिदिन 10 से 15 डिलेवरी आ रही है वहां न तो महिला रोग विषेषज्ञ डाक्टर है न ही षिषुरोग विषेषज्ञ डाक्टर यह कैसी संवेदनहीन सरकार है।

                सीबीएमओ डा. पीडी करगैयां ने बताया कि डाक्टर व स्टाफ की कमी के कारण ऐसी समस्या आ रही है। इस संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।

हटा से संजय जैन