सामने आया प्रधान मंत्री आवास घोटाला, अपात्रों को मिला माकान, ग्रामीणों ने लगाया आरोप

उमरिया -जिले के मानपुर जनपद के ग्राम पंचायत सलैया में सामने आया प्रधान मंत्री आवास घोटाला, अपात्रों को मिला माकान, ग्रामीणों ने लगाया आरोप, मुख्य मंत्री ने अपात्र को दिया अच्छे माकान का ईनाम, पंचायतकर्मी ने लोगों से लिया पैसा, नल जल योजना भी पड़ी है बंद, कपिल धारा योजना के कुआं के नाम पर भी वसूला गया पैसा, जिले के कलेक्टर कहे जांच कराने को और प्रभारी मंत्री भी बताये कि जिले की सभी पंचायतों को नल जल योजना चालू करने को दिया गया है पैसा, हम जांच करवा रहे हैं | देखिये एक रिपोर्ट

   उमरिया जिले में पंचायतों में घोटाले रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं, फर्जी जानकारी भेज कर प्रदेश स्तर पर मुख्य मंत्री से ईनाम भी दिलवा दिए अधिकारी, जब जमीनी हकीकत जानने मानपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सलैया पहुंचे तो वहां कुछ और ही नजारा सामने आया, सबसे पहले उनसे मिलते हैं जिनको मुख्य मंत्री ने दिया 11 हजार रुपये का ईनाम,  राम कृष्ण तिवारी कहते हैं कि जब पंचायत में बताये कि आपका आवास मंजूर है तब मैं घर बनाना चालू किया 5 6 माह हुए हैं 1 लाख 46 हजार रुपया मिला है, पूरा पैसा मिल गया, 11 हजार रूपये मेरे को ईनाम दिए बहुत अच्छा लगा, सी एम साहब मेरे को लेकर गए, अभी कुछ दिन और लगेगा माकान पूरा होने में, तेजी से काम कर लिए पेमेंट जल्दी जल्दी आ गई थी, सचिव साहब, कलेक्टर साहब भी देखे तो खुश हुए, बोले कि आप अच्छा काम करते हो थोड़ा जल्दी कर लीजिये तो अच्छा रहेगा, आपका नक्शा नमूना अच्छा है |

   अब जरा सुने गाँव वाले क्या बताते हैं, सबसे पहले पूर्व सरपंच नत्थू लाल पटेल कहते हैं कि वो माकान 4 साल पहले से बन रहा है और अपने पैसे से बन रहा है, सचिव और रोजगार सहायक मिल कर पैसा खाकर पी एम आवास से जोड़ दिए हैं, जबकि उस माकान की लागत आज की स्थिति में 5 6 लाख रुपये है, डेढ़ लाख रूपये में कोई भी पी एम आवास वाला उस तरह का माकान नहीं बना सकता, ठेके से मजदूर लगे थे ठेके से घर बना है | वहीं राम पाल कुशवाहा बताते हैं कि 4 साल पहले से माकान बन रहा है अपने से बनवाए हैं बचहा के जायसवाल को ठेके पर देकर बनवाए हैं, ठेके से छत भी अभी 20 दिन पहले डलवाए हैं और पी एम आवास के तहत जोड़ दिया गया है, गरीबी रेखा से बाहर के व्यक्ति हैं, उनके यहाँ महिला बहुउद्देशीय की दूकान है जो किराए से दिए हैं | अगर गौर किया जाय तो इतना लंबा चौड़ा माकान किसी भी हालत में 1 लाख 46 हजार में नहीं बन सकता है |

   अब ज़रा पंचायत में बन रहे दूसरे प्रधान मंत्री आवास के हितग्राही से मिलें देखें वहां की क्या स्थिति है, विश्वनाथ यादव खुद बता रहे हैं कि मैं अभी से माकान बनाया हूँ, मैं पहले बाहर था, सूचना मिला कि तुम्हारा घर मंजूर है तो मैं काम लगा दिया अपने पास से 3 लाख लगा चुका हूँ पंचायत से डेढ़ लाख मिला है अभी छपाई में 50 60 हजार रूपया लग जाएगा |

   ये तो थे गरीबी रेखा से बाहर के हितग्राही अब ज़रा गरीबी रेखा के भीतर वालों से भी मिलें उनके क्या हाल हैं, पहले संतोष कुशवाहा से मिलते हैं, इनका कहना है कि हमारे घर के खपड़ा उतरे हैं, उसके पहले गड्ढा खुदाई नहीं हुई है इसके पहले सहायक सेकेट्री साहब बोले हैं कि पहले पैसा मेरे को दो इसके बाद निकलवाओ, दो हजार रूपया उसको दिया और घर भी गिरवा दिया, रहने के लिए घर भी नहीं है एक कमरा है उसी में रहते हैं और एक बूट भी जगह नहीं है, दो हजार रुपये वो लिया उसके बाद 5 सौ रुपये मनीष गुप्ता लिया है जो मेट है वो घर से ले जाता था और अभी 5 सौ रुपये मांग रहा है, वहीँ मंगल कुशवाहा बताया कि मेरे से 4 हजार रुपये ले लिए और आवास भी नहीं मिला कागज में दस्तखत भी करवा लिए हैं, और भटक रहे हैं, शिव लाल कुशवाहा बता रहा है कि 3 हजार रूपये रोजगार सहायक ले लिए हैं और हमारा घर अधूरा है अभी और मांग रहे हैं,

    ये तो है उमरिया जिले में प्रधान मंत्री आवास का सच दो लोग तो गरीबी रेखा से बाहर के हितग्राही हैं और जो पात्र हैं उनके पास रहने का ठिकाना भी नहीं बचा और ऊपर से पैसे भी वसूल लिए गए उसके बाद मुख्य मंत्री की आँख में धूल झोंक कर ईनाम भी दिलवा दिए, इसके लिए अगर देखा जाय तो पूरा जिला प्रशासन ही दोषी है जनपद से लेकर जिला पंचायत तक के अधिकारियों की मिली भगत है जो जिले में प्रधान मंत्री आवास घोटाला में शामिल हैं, इसके लिए आवश्यकता है उच्च स्तरीय जांच की जिसमें सच्चाई सामने आ सके |

   अब ज़रा ग्राम पंचायत सलैया में दूसरे तरफ किये जा रहे भ्रष्टाचार की तरफ देखें तो वहां भी ढोल में पोल ही नजर आ रहा है चाहे पेय जल का मामला हो या कपिलधारा योजना, हर तरफ लोग परेशान ही नजर आये आइये देखते हैं दोनों मामले

व्ही ओ 1 सबसे पहले नल जल योजना की तरफ चलते हैं यहाँ ट्यूब वेल तो है और चालू भी है लेकिन पीने को पानी किसी को नहीं मिलता है, गाँव के बुजुर्ग कोदू लाल बताते हैं कि हैण्ड पम्प तो तीनो बिगड़े पड़े हैं और ट्यूब वेल का पानी यहीं पर गिरता था जिससे ले जाते बना ले गए सचिव लिख देता है कि पूरा कोलान मोहल्ला पीता है कोई नहीं पीता है सचिव के माथे भूखे प्यासे मर जायेंगे, एक मशीन पीछे खड़े आदमी की चलती है और एक दया राम की चलती है किसान गाँव वालों को पानी देते हैं पंचायत के माथे पानी नहीं मिलता है, और लिख ले जाते हैं सब सही है, वहीँ राम प्यारे कुशवाहा बताते हैं कि पानी यहीं गिर जाता है, गाँव में चेक नहीं किया गया और न चढ़ाया गया, न पहुंचाया गया, पाईप लाइन ख़राब है, सही पाईप लगाया ही नहीं गया हैण्ड पम्प से पानी पीते हैं बिगड़ने पर नदी से 3 किलोमीटर से पानी लाते हैं |

   अब कपिलधारा योजना से बनने वाले कुओं की तरफ देखते हैं उनके क्या हाल हैं, गाँव के मंगू कुशवाहा बताते हैं कि 2  हजार रुपये हरी ओम ले लिए हैं अभी तक कुआं नहीं खोदवा रहे हैं, वहीँ दूसरे हितग्राही अशोक कुशवाहा बताते हैं कि सचिव 2 हजार ले लिए हैं 5 हजार रुपये मांग रहे थे लेकिन 2 हजार रुपये लिए हैं सब गाँव वालों से लिए हैं |

    अब ज़रा शासन और प्रशासन का क्या कहना है उस पर भी गौर किया जाय, जिले के दौरे पर आये जिला प्रभारी मंत्री और प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ओम प्रकश धुर्वे कहते हैं कि टोटल नल जल योजनाओं में से 87 नल जल योजना बंद बताये जा रहे थे ग्राम पंचायत में उसके लिए हमारे पास में पी एच ई में 2 करोड़ रुपये की राशि आई थी तो सम्बंधित पंचायतों को, वहां से जो भी मांग आया था हो सकता है किसी के यहाँ पाईप लाईन चोक हो गया या पाईप लाईन विस्तार किया जाय या फिर वहां पर ट्रांसफार्मर ख़राब है या सब मर्शिबल खराब है या जो भी खराब है, उस हिसाब से सम्बंधित पंचायतों को राशि दे दी गई, कलेक्टर साहब ने निर्देश कर दिए हैं एक सप्ताह में जांच करवा कर उसकी रिपोर्ट आ जाय और वहां की नल जल योजना बंद पाई गई और राशि का दुरुपयोग पाया गया तो उसके ऊपर कार्यवाही होगी | अब जरा जिले के कलेक्टर माल सिंह जी क्या कहते हैं उनकी भी सुने, इस मामले में कह रहे हैं कि पिछली बार हमारे पास यह शिकायत आई थी, हमने जांच के निर्देश दे दिए हैं और जांच रिपोर्ट आ जाय तब पता चलेगा कि वास्तव में कोई अनियमितता है या नहीं |

   अगर उमरिया जिले को घोटालों का जिला कहा तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी यहाँ जिस पंचायत में नजर डाला जाय वहीँ बन्दर बाँट होता नजर आ रहा है और अधिकारी एवं मंत्री जांच का आदेश मात्र देकर भूल जाते है कि उसके बाद पीड़ित को राहत देने के लिए कोई कार्यवाही भी करनी है, इससे तो साफ़ नजर आ रहा है देश के प्रधान मंत्री और प्रदेश के मुख्य मंत्री की योजनाओं को पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोडी जा रही है, या अगर कहें कि बागड़ ही खेत खाए तो रखवाली कौन करेगा, वाली कहावत पूर्णतया उमरिया जिले में लागू है |

                                     सुरेन्द्र त्रिपाठी

                                        उमरिया