Old khanda live What is the cost of water in life? This village is a living example of the exploitation found in the village.

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पुरानाखेड़ा लाइव
जीवन मे पानी की क्या कीमत होती इस गांव में देखने को मिली शोषण का जीता जागता उदाहरण है यह गांव

हटा/- जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत शिवपुर के अन्तर्गत आने वाला गांव पुरानाखेड़ा में बरसात के दिनों में भी गांव के लोग पानी के लिए कोसों दूर भटकते है, पूरा गांव दो टोला में बसा हुआ। पत्थर पर बसे इस गांव के दोनों टोला में करीब दो सौ परिवार बंजारा समाज के रहते है। दोनों टोला की जनसंख्या लगभग 700 बताई गई है, पूरे गांव में खेती योग्य भूमि व रोजगार न होने के कारण अधिकां पुरूष वर्ग रोजगार की तला में दिल्ली, गुडगांव, नोयडा गये हुए है। इन टोला में मात्र 70 पुरूष ही गांव में है, गांव में ज्यादातर महिलाएं, बच्चे ही रह रहे है।


गांव में बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल है, सरकार के दस्तावेजों के अनुसार गांव में नल जल योजना भी चल रही है, गांव को मुख्यमार्ग से जोड़ा गया है लेकिन गरीबी के कारण लोग पैदल ही बाजार करने 4 किलोमीटर दूर मडियादों जाते है।


हिल्ली बाई अपनी चार बेटियों के साथ पानी भरने पत्थरों के बीच बने झरने जा रही थी उसने बताया कि सात साल पहले मेरा पति झरना पानी भरने गया था, आकाीय बिजली गिरने के कारण उसकी मौत हो गई। सरकार ने पचास हजार रूपये दिये थे, दिन तेरहवीं में कर्जा हो गया था वो पैसा उसी में चुक गया। एक बेटी बीमारी के चलते दुनिया से चल बसी, अब चार बेटी हमारे पास हैं, बेटियों का आधार कार्ड एवं समग्र आईडी न होने के कारण मेरे बच्चों के नाम स्कूल में नहीं लिख पा रहे है। जब स्कूल लगता है तो हमारी बेटियां स्कूल को दूर से ही देखती रहती है। रोजगार सहायक से आईडी और आधार कार्ड बनाने की बात कही तो उसने मेरी नहीं सुनता।


गांव की पूर्व सरपंच गौरा बाई ने बताया कि जबसे गांव बसा है तभी से गांव में पानी की समस्या है, छै साल पहले बुंदेलखंड पैकेज से करीब 24 लाख की लागत से नल जल योजना प्रारंभ की गई थी। लेकिन दुर्भाग्य है इस योजना से गांव वालों को आज तक पानी नहीं मिला।
उद्दी बाई, हीरी बाई, धम्मो, भूरी बाई, धरमी बाई ने बताया कि गांव के जो हेण्डपंप है उन में से पीला जंग लगा पानी आता है, इस कारण कोई भी उसका पानी उपयोग नहीं करता है। नन्नी बाई, भग्गों ने बताया कि जिस झरना से पानी लाते है उसी झरना से मवेी पानी पीते वही पानी हमें पीने मिल रहा है। नेता यहां सिर्फ वोट मांगने आते है, अधिकारियों के वाहनो के चक्के यहां थमते नहीं, वन विभाग वाले आते है जो सभी को डराते धमकाते रहते है और गांव खाली करवाने की धमकी देते रहते है। गांव में बिजली का कोई ठिकाना नहीं है, अभी चार माह से बिजली बंद होना बताया गया। गेंहू की पिसाई के लिए भी चार किलोमीटर दूर मडियादों जाना पड़ता है।


पीएचई एसडीओ एचएल अहिरवार, पीएचई के उपयंत्री एपी पांडे ने बताया कि सरपंच ने मुझे बताया कि गांव में नल जल योजना चालू है।
ग्राम पंचायत शिवपुर के सरपंच अजुद्दी दहायत ने बताया कि गांव में नलजल योजना के लिए मोटर डाल दी है, योजना चालू है। गांव वालों को बता दिया कि कैसे चालू करना कैसे बंद करना, हमारे पास इतना समय नहीं रहता कि हम गांव नल चालू करने देखने बार बार वहां जायें।
गांव की महिलाएं बताती है तो पता नहीं ये नल जल कैसे चालू है, जिस छोटे कुंड से पानी ला रहे उसमें बहुत कम मात्रा में पानी आ रहा, पानी भरने के लिए बहुत इंतजार करना पड़ता है। बड़े वाले कुंड में कई जम गई है, पानी में कीड़े हो गये। उसकी का सब गांव वाले उपयोग कर रहे है। आप भी यहां आकर चले जाओगें, यहां की न तो तस्वीर बदलने वाली है न ही हमारी तकदीर।
अकड़े गांव वालों के दुवारा बातये गये कुछ आगे पीछे भी हो सकते है

संजय जैन हटा से