खादानो की बंदरबांट में बदनाम होती भाजपा सरकार, जनता की तकलीफों पर अपने रसूख का खनन जारी ?

सागर- अवैध उत्खनन मामलों में बदनामी का दाग छुपाती भाजपा सरकार पर खादानो की बंदरबांट का आरोप लगा हैं?  सुरखी विधान सभा के एक गांव का दर्द उस वक़्त हरा हो गया जब उनके विधायक ने खादानो की इस बंदरबांट को रोकने की वजह एक खदान अपने रसूख का इस्तेमाल कर खुद अपने नाम करा ली  ..ग्रामीणों ने कलेक्टर से गुहार लगाकर कहा हैं कि इन खनन माफियो से मेरे गांव को बचा लो …कलेक्टर ने बमुश्किल इस मामले में कार्यवाही की बात की हैं ।

सरकार की छवि बिगड़ते देख जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री विधायको से वन टू वन कर जनता की तकलीफे दूर करने की बात कह रहे हैं । वही विधायक हैं कि जनता को मलहम लगाने की वजह उसे तकलीफे देने पर आमादा हैं । ताज़ा मामला सुरखी विधान सभा क्षेत्र के समनापुर गांव का हैं , जहां के सचिव ने पटवारी से मिलकर भाजपा पार्टी  के रसूखों को गांव से सटे क्षेत्र में स्टोन क्रेशर के लिए खदाने दे दी ।  ग्रामीणों ने मामले की शिकायत सरकार पक्ष की  स्थानीय विधायक पारुल साहू केशरवानी से की लेकिन वो जानकार हैरान हो गए.. क्योंकि उनके विधायक के पतिदेव नीरज केशरवानी के नाम इस क्षेत्र में एक खदान पहले ही स्वीकृत हो गई थी । गांव वालों का आरोप हैं कि इस गांव के चारो ओर चरनोई की जमीन पर एक नही बल्कि 14 खदाने भाजपा के नामचीन चेहरों को प्रशासन ने नियमो को ताक पर रखकर दे दी..हद तो तब हो गई जब सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन को ठेंगा दिखाकर सिया की रिपोर्ट को दरकिनार कर प्रशासन ने 14 लोगो को स्टोन क्रेशर खोलने की रेबडी बांट दी , सिया रिपोर्ट की धज्जियां उड़ाने का  अंदाज इसी से लगाया जा सकता हैं क्योंकि खदानों से दस पचास मीटर पर नेशनल हाइवे 26 है   । प्रशासन की अनदेखी साफ जाहिर होती हैं कि प्रदूषण विभाग के नियम कहते हैं क्लिस्टर में 25 हेक्टेयर से ज्यादा रकवा खनन के लिए इस्तेमाल नही होना चाहिये लेकिन यहां इस नियम की हवा निकालते हुए 29.5 हेक्टेयर जमीन खदानों के लिए लीज पर दी गई ।  इतना ही नही गांव के सचिव सचिन दुबे ने अपनी पत्नी के नाम एक लीज सेक्सन करा ली। गांव वाले कहते हैं कि इन 14 खदानों में ग्राम पंचायत की कोई सहमति नही थी । ग्रामपंचायत की बिना एनओसी लिए सचिव और पटवारी ने मिलकर विधायक के इशारे पर कूटरचित दातावेजो के तहत इन खनन माफियो को ग्रामपंचायत की एनओसी जारी कर दी । आलम यह है कि गांव के चारो ओर इन खनन माफियो का कब्जा हो गया हैं , गांव के पास अब इतनी भी जमीन नही हैं कि वो जानवरों को घर से बहार छोड़ सके । लोगो के आंगन के बाजू से स्वीकृत की गई खदानो के ख़िलाफ़ ग्राम पंचायत ने ग्राम सभा आहूत कर इस मामले के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर कलेक्टर को लिखित शिकायत सौपी हैं ।

प्रतीक फोटो

वही जब मीडिया ने क्लिस्टर के नियमो की बात कर खनिज अधिकारी से बात की तो उनका कहना था कि उन्होंने नियमो के तहत खदान स्वीकृत की हैं । वही जिले के कलेक्टर इस मामले में जांच कराने की बात कह रहे हैं । हालांकि कलेक्टर कह रहे हैं कि बिना ग्राम पंचायत की स्वीकृति यानी एनओसी के बिना खदाने स्वीकृत नही हो सकती । बहरहाल खदाने स्वीकृत हो चुकी हैं । जांच भी बैठ चुकी हैं । अब ऐसे में देखना होगा कि यहां एक गांव की तकलीफे दूर करने के लिए खदाने निरस्त होती हैं या फिर विधायक के साथ 14 लोगो की जीत होती हैं जो जनता की तकलीफों पर अपने रसूख का खनन जारी रखेंगे ।

सागर से टेकराम ठाकुर