बिना परमीशन मचाया शोर तो जेल और जुर्माना

लाउडस्पीकरपर गरमाई राजनीति, सरकार ने शुरू की धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई

लखनऊधार्मिक स्थलों या सार्वजनिक स्थलों पर बिना परमीशन लाउडस्पीकर लगाना अब कानून का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसा करने वालों के खिलाफ न सिर्फ मुकदमा दर्ज होगा बल्कि, दोषी पाये जाने पर उन्हें पांच साल की सजा या जुर्माना हो सकता है, उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों पर बजने वाले लाऊडस्पीकर अब हटा दिए जाएंगे, उन धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटेंगे, जिन्होंने प्रशासन से इजाजत नहीं ली है, योगी सरकार ने ऐसे धार्मिक स्थलों की पहचान का काम शुरू कर दिया है. हालांकि इस पर राजनीति भी शुरू हो चुकी है, जारी नए आदेशों के अनुसार अब नये सिरे से तयशुदा मानकों से ज्यादा का शोरगुल नहीं हो पाएगा। धार्मिक स्थल, बारात, मांगलिक कार्यक्रम, जुलूस और सार्वजनिक स्थलों पर होने वाले कार्यक्रमाें में अब ध्वनि प्रसारण यंत्रों का इस्तेमाल करने की अनुमति लेनी होगी। धार्मिक स्थलों पर जहां पहले से ही ऐसे यंत्र इस्तेमाल हो रहे हैं वहां भी नये सिरे से अनुमति ली जाएगी।

धार्मिक स्थल व सार्वजनिक स्थल के प्रबंधकों को 15 जनवरी से पहले परमीशन प्राप्त करने के लिये निर्धारित प्रारूप में नोटिस और आवेदन का फॉर्म मुहैया कराएगी। जिसके बाद प्रबंधकों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत करना होगा। वहीं, जिला प्रशासन स्थानीय थाना व तहसील आदि से आवश्यक रिपोर्ट प्राप्त कर उन्हें पांच दिन में परमीशन दिया जाना सुनिश्चित करेंगे, इस फैसले को लेकर अलग-अलग धर्मों के लोगों की राय अलग है, शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा है कि पहले मस्जिद में लगे हुए लाऊडस्पीकरों को हटाइ बाद में मंदिरों से बंद कराइए