आखिर क्यों आशा कार्यकर्ताओ को होना पड़ रहा है शर्मसार ?

सिवनी – एक ही कलर की साड़ियों में ये अनेक महिलाएं अपने हाथों में निरोध लिए जब सिवनी के अतिव्यस्तम चौराहे में आंदोलन करती दिखी तो हर राहगीर का ध्यान उनकी तरफ दिखा जी हाँ ये सभी महिलाए आशा कार्यकर्ता है और ये निरोध का विरोध कर रही हैं और विरोध का कारण है निरोध का नाम जो कि पहले का नाम डीलक्स से बदलकर आशा निरोध हो गया है, गौरतलब है कि सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में परिवार नियोजन के लिये

वितरीत की जाने वाली कंडोम जो कि पहले डीलक्स निरोध के नाम से दी जाती थी उसका नाम बदलकर अब आशा निरोध रख दिया गया है। उस पर जुल्म की बात ये कि इनका वितरण भी आशा वर्करों द्वारा किया जाता है जो कि महिलाएं ही ह मध्यप्रदेश के सिवनी मुख्यालय की आशा वर्करों ने इस पर आपत्ति जताई है। आशा वर्करों का कहना है कि कंडोम का नाम आशा निरोध होने से उनके साथ छेड़खानी की जाती है। उन्हें टोंट मारे जाते हैं। एक आशा देना कहकर उनका मजाक उड़ाते हैं। यह सब बहुत ही असभ्य और भद्दे तरीके से होता है जिससे उन्हें शर्मसार होना पड़ता है। इतना ही नहीं सरकारी हिदायतें हैं कि निरोध जिसे भी दी जाये उससे एक रूपया भी कीमत के रूप में लिया जाये लेकिन शर्म के मारे वह यह भी नहीं ले पाती और इसका भुगतान अपनी जेब से करना पड़ता है।

सिवनी से सोनू गुप्ता