जीवन मे जब एक अच्छे संत की प्राप्ति हो जाती है तो भगवन्त की प्राप्ति स्वतः हो जाती है

सागर,अहमदनगर वृन्दावन वार्ड में चल रही भागवत कथा के चतुर्थ दिवस की बेला में कथा व्यास,पंडित देवब्रत जी महाराज ने बताया कि ध्रुब के जीवन मे जब नारद जैसे सन्त मिल गए तो ध्रुव जी को पांच वर्ष में ही भगवान मिल गए।और भगबान ने ध्रुव जी को अटल भक्ति प्रदान की ओर धुव्र जी के पुत्र अंग,अंग के पुत्र वेन हुये।। वेन ने राज गद्दी पर बैठ कर इतना अत्याचार किया कि जहाँ यज्ञ ,हवन, पूजा, पाठ होते थे।उन्होंने सब बंद करवा दिए।ओर इस अत्याचार का फल क्या मिला कि पूरी पृथ्बी पर अकाल पड़ गया ऋषियों ने राजा अंग को मार दिया फिर उनके शरीर का मन्थन किया जिससे राजा पृथु का प्राकट्य हुआ और राजा ने जब 99 यज्ञ किये तो भगवान प्रगट हो गए और आशीर्बाद दिया जिससे पुनः पृथ्बी पर अनाज

उत्पन्न हुआ जब जब इस पृथ्वी पाप बढ़ते है तो अकाल पड़ता है और फिर उस टाइम कोई संत आता है बो पुण्य के माध्यम से पुनः इस पृथ्बी पर खुशहाली लाता है।इस प्रकार जड़भरत की कथा सुनाते हुये अजामिल नाम के ब्राह्मण की कथा सुनाई कहा कि अजमिल एक सदाचारी ब्राम्हण एक बेश्या को देखकर दूषित हो गया और अत्त्याचार कारने लागा लेकिन जब अजमिल के जीवन मे संत आय तो उन्होंने अजामिल से कहा कि आपके यहाँ जो पुत्र हो उसका नाम नारायण रख लेना और अजमिल ने ऐसा ही किया और अंत मे जब अजमिल को यम के दूत लेने आए तो अजमिल अपने पुत्र का नाम नारायण नारायण चिल्लाने लगा तो भगवान नारायण के दूत आ गए और अजमिल को बैकुंठ धाम लें गए इस प्रकार भगवान के नाम की महिमा बताई की कलियुग में सबसे अच्छा सबसे सरल भगबान का नाम है जो हमे इस भव सागर से पार ले जाता है प्रहलाद के जीवन मे भी संत की प्राप्ति हुई तो प्रहलाद ने अपने पिता के कहने पर भगवान को पत्थर के खम्ब से प्रगट कर दिया उसमे से नरसिंह भगवान का प्रादुर्भाव हुआ। लोग पूछतें है कि तुम पत्थर भगवान को क्यों पूजते हो तो हमारे सनातन वैदिक धर्म मे पत्थर की बड़ी महिमा है।एक पत्थर मंदिर में आकर मंत्रो के द्वारा उसमे प्राण डाल दिये जाते है और बो पत्थर भगवान के रूप में पूजने लगता है लेकिन हम रोज मन्दिर जाते है लेकिन हम इंसान नही बन पाते। इस प्रकार गजग्राह चरित्र बलि बामन चरित्र समुद्र मंथन एबं श्रीराम जी के चरित्र सुनाय राजा दशरथ के यहाँ संतान नही थी लेकिन जब राजा को गुरु कृपा संत कृपा हुई तो राजा के यहाँ 4 पुत्र हुये।स्वयं भगवान उनके यहाँ पुत्र बन कर आये।अंत मे कथा पंडाल में बड़े धूम धाम से कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया कथा पांडाल को मंदिर की तरह सजाया गया और ओर सभी भक्तों ने बड़े आनंद के साथ भगबान कृष्ण की कथा श्रवण की ।।कथा का वचन 3 वजे से शाम 6 बजे तक किया जाता है