हरि को हर से मिलने में;व्याकरण के 14 सूत्रों का निमार्ण हुआ -दद्दा जी

बांदकपुर- संसार में भौतिक चिंताएं इतनी अधिक हो जाती हैकि नर अपने कमॅ को नारी अपने धमॅ को नारायण अपने ममॅ को छोड़ देते हैं । ठीक वैसा ही राजा परीक्षित के साथ हुआ । एक समय ऐसा था जब त्रिविध व्याधियां सुबह-सुबह सम्राट परीक्षित के दरवाजे पर आकर प्रणाम करती थी ।राजा परीक्षित उन्हें आदेश देते थे कि हे त्रिविध व्याधियों तुम्हारा हस्तिनापुर की पवित्र बंसधुरा पर कोई कायॅ नहीं है यहाँ से जाओ ।आज वही परीझित अभिशापित होकर,सातवें दिन तझक नाग के काटने की प्रतीक्षा में है ।
          शुक्रदेव जी कहते हैं कि श्रीमद् भागवत् में भगवान श्रीकृष्ण की ऐश्वर्य लीला एवं माधुर्य लीला है ।लेकिन परमात्मा निराकार में हरिलीला करते हैं । साकार स्वरूप में नरलीला ।
            दद्दा जी कहते हैं कि प्रत्येक माता चाहती है कि मेरे यहाँ भी कन्हैया पुत्र के रूप में जन्म ले पर यह संभव नहीं है क्योंकि नर के कमॅ में नारी के धमॅ में अंहकार बना रहता है । जिससे धमॅ कमॅ निष्फल हो जाता है ।यशोदा जो धमॅ करतीं थी उसका यश दूसरों को देती थी ।यशोदा अथाॅत जो अपना यश दूसरों को दे ।
        बाबा नंद का पूरा नाम आनंद था एक दिन एक व्यक्ति दुःखी होकर बाबा आनंद के पास आया और कहने लगा कि बाबा मेरी रझा करो लोग मुझे  सताते है मेरा अपमान करते हैं । बाबा ने कहा तुम मेरी शरण में आए हो तुम्हारा कोई अपमान नहीं करेगा । क्रूर बोला बाबा इसमें मेरा भला नहीं होगा । जब में आपके पास से अन्यत्र चला जाऊंगा तब मुझे अपमानित होना पडेगा । बाबा आनंद ने पूछा तब क्या किया जाए जिससे तुम्हारी समस्या का समाधान हो ।तब क्रूर ने प्राथॅना की बाबा आप मुझ पर कृपा कर अपने नाम का अझर ” अ” मुझे प्रदान कर देंवे जिससे में क्रूर से अक्रूर हो जाऊंगा । बाबा ने यही किया । बाबा आनंद “नंद ” हो गए और क्रूर-अक्रूर बन गए ।

 


      चिंतन कीजिए कि हम ऐसे क्यों नहीं क्योंकि हमारे जीवन में अपणॅ तो है समपर्ण नहीं । कृष्ण जैसा पुत्र चाहिए तो नारी को यशोदा और नर को नंद बनना पड़ेगा ।
         श्रीमद् भागवत् प्रवचन के छटवें दिवस पर जागेश्वर धाम बांदकपुर में आयोजित 122वें यज्ञ के अवसर पर दद्दा जी कहते हैं कि जीवन में बदलाव आना चाहिए कथा श्रवण मात्र से भला नहीं होने वाला उसे आचरण में लाना चाहिए ।कथनी और करनी में एकता का संपादन आवश्यक है ।यही एकाग्रता का सूत्र है यदि आप ऐसा करते हैं तो कथा नहीं कथा सार आपको मिल जाएगा ।
       दद्दा शिष्य मंडल के प्रवक्ता वीरेन्द्र गौर ने बताया है कि आज 16 जुलाई को सातवें दिवस पर सभी कायॅक्रम पूणॅ आहुति के साथ दद्दा जी के आशीष वचन दोपहर में ही होंगे एवं दोपहर में ही यज्ञ समापन की घोषणा दद्दा जी के श्रीमुख से होगी
             सातवें दिन तो ऐसा श्रृद्धालुओं का जनसैलाव उमड़ा कि जो जहाँ बैठा वहीं बैठकर रह गया पैर रखने की जगह भी नहीं बची । अभिषेक साम्रगी बांटने में कार सेवक पसीना में नहा गए । भक्ति के भाव ऐसा रहा कि भक्तों ने पेपर,पुठ्ठे में शिवलिंग निमार्ण किए तो महिलाओं ने साड़ी के पल्लो में शिवलिंग निमार्ण कर विसॅजन करते जाते समय साड़ी के पल्लो से ही विसॅजन किया । लाखों की संख्या में बनाए गए शिवलिंग की गिनती भी नहीं हो सकीं । छातों को सड़कों पर लहराते हुए हर भक्त ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई ।
डॉ अनिल त्रिपाठी जी की भजन प्रस्तुति की अनूठी छटा से तालियों की गडगडाहट की गूँज से गूँज उठा बांदकपुर । प्रवक्ता वीरेन्द्र गौर ने बताया है कि  छटवें दिवस पर 70,000 से अधिक श्रृद्धालुओं के भोजन हुए एवं 80,000 से अधिक की संख्या में जनसैलाव बांदकपुर पुहंच शिवमय बन गया धमॅझेत्र ।
              महारूद्राभिषेक के  अवसर पर दद्दा जी ने महाआरती की है । गुरु मां ने भी महाआरती की है ।फिल्म अभिनेता राजपाल यादव सहित बड़ी संख्या में गुरु भाईयों ने आरती में भाग लिया है । राधे राधे मंडल सागर की झंकार का समा बंधा रहा ।
            *श्रावण मास के पवित्र अवसर दद्दा जी ने भी शिवलिंग निमार्ण किए । दद्दा जी के श्रीकमलों से गुरु भाई सुजीत सतना द्वारा बनाए गए छाया चित्रों का दद्दा जी ने लोकार्पण किया गया । लोकार्पण के अवसर पर दद्दा शिष्य मंडल के वरिष्ठ गुरु भाई वीरेन्द्र गौर प्रवक्ता , अशोक दीझित, मनु मिश्रा, संतोष गंगेले, राजू राय सहित स्थानीय लोगों ने भाग लिया है ।
            प्रवक्ता गौर ने बताया है कि 16 जुलाई को यज्ञ के समापन अवसर पर 1 लाख से अधिक श्रृद्धालुओ के  शामिल होने की संभावना है ।
         इस अवसर पर पूवॅ सांसद चंद्रभान सिंह, विधायक प्रताप सिंह जवेरा,सिद्धार्थ मलैया, मनु मिश्रा,प्रदुम सिंह,वीरेन्द्र गौर,संतोष गंगेले, हाकिम सिंह, प्रेस विज्ञप्ति
हरि को हर से मिलने में;व्याकरण के 14 सूत्रों का निमार्ण हुआ -दद्दा जी
बांदकपुर- संसार में भौतिक चिंताएं इतनी अधिक हो जाती हैकि नर अपने कमॅ को नारी अपने धमॅ को नारायण अपने ममॅ को छोड़ देते हैं । ठीक वैसा ही राजा परीक्षित के साथ हुआ । एक समय ऐसा था जब त्रिविध व्याधियां सुबह-सुबह सम्राट परीक्षित के दरवाजे पर आकर प्रणाम करती थी ।राजा परीक्षित उन्हें आदेश देते थे कि हे त्रिविध व्याधियों तुम्हारा हस्तिनापुर की पवित्र बंसधुरा पर कोई कायॅ नहीं है यहाँ से जाओ ।आज वही परीझित अभिशापित होकर,सातवें दिन तझक नाग के काटने की प्रतीक्षा में है ।


          शुक्रदेव जी कहते हैं कि श्रीमद् भागवत् में भगवान श्रीकृष्ण की ऐश्वर्य लीला एवं माधुर्य लीला है ।लेकिन परमात्मा निराकार में हरिलीला करते हैं । साकार स्वरूप में नरलीला ।
            दद्दा जी कहते हैं कि प्रत्येक माता चाहती है कि मेरे यहाँ भी कन्हैया पुत्र के रूप में जन्म ले पर यह संभव नहीं है क्योंकि नर के कमॅ में नारी के धमॅ में अंहकार बना रहता है । जिससे धमॅ कमॅ निष्फल हो जाता है ।यशोदा जो धमॅ करतीं थी उसका यश दूसरों को देती थी ।यशोदा अथाॅत जो अपना यश दूसरों को दे ।
        बाबा नंद का पूरा नाम आनंद था एक दिन एक व्यक्ति दुःखी होकर बाबा आनंद के पास आया और कहने लगा कि बाबा मेरी रझा करो लोग मुझे  सताते है मेरा अपमान करते हैं । बाबा ने कहा तुम मेरी शरण में आए हो तुम्हारा कोई अपमान नहीं करेगा । क्रूर बोला बाबा इसमें मेरा भला नहीं होगा । जब में आपके पास से अन्यत्र चला जाऊंगा तब मुझे अपमानित होना पडेगा । बाबा आनंद ने पूछा तब क्या किया जाए जिससे तुम्हारी समस्या का समाधान हो ।तब क्रूर ने प्राथॅना की बाबा आप मुझ पर कृपा कर अपने नाम का अझर ” अ” मुझे प्रदान कर देंवे जिससे में क्रूर से अक्रूर हो जाऊंगा । बाबा ने यही किया । बाबा आनंद “नंद ” हो गए और क्रूर-अक्रूर बन गए ।
      चिंतन कीजिए कि हम ऐसे क्यों नहीं क्योंकि हमारे जीवन में अपणॅ तो है समपर्ण नहीं । कृष्ण जैसा पुत्र चाहिए तो नारी को यशोदा और नर को नंद बनना पड़ेगा ।
         श्रीमद् भागवत् प्रवचन के छटवें दिवस पर जागेश्वर धाम बांदकपुर में आयोजित 122वें यज्ञ के अवसर पर दद्दा जी कहते हैं कि जीवन में बदलाव आना चाहिए कथा श्रवण मात्र से भला नहीं होने वाला उसे आचरण में लाना चाहिए ।कथनी और करनी में एकता का संपादन आवश्यक है ।यही एकाग्रता का सूत्र है यदि आप ऐसा करते हैं तो कथा नहीं कथा सार आपको मिल जाएगा ।
       दद्दा शिष्य मंडल के प्रवक्ता वीरेन्द्र गौर ने बताया है कि आज 16 जुलाई को सातवें दिवस पर सभी कायॅक्रम पूणॅ आहुति के साथ दद्दा जी के आशीष वचन दोपहर में ही होंगे एवं दोपहर में ही यज्ञ समापन की घोषणा दद्दा जी के श्रीमुख से होगी
             सातवें दिन तो ऐसा श्रृद्धालुओं का जनसैलाव उमड़ा कि जो जहाँ बैठा वहीं बैठकर रह गया पैर रखने की जगह भी नहीं बची । अभिषेक साम्रगी बांटने में कार सेवक पसीना में नहा गए । भक्ति के भाव ऐसा रहा कि भक्तों ने पेपर,पुठ्ठे में शिवलिंग निमार्ण किए तो महिलाओं ने साड़ी के पल्लो में शिवलिंग निमार्ण कर विसॅजन करते जाते समय साड़ी के पल्लो से ही विसॅजन किया । लाखों की संख्या में बनाए गए शिवलिंग की गिनती भी नहीं हो सकीं । छातों को सड़कों पर लहराते हुए हर भक्त ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई ।
डॉ अनिल त्रिपाठी जी की भजन प्रस्तुति की अनूठी छटा से तालियों की गडगडाहट की गूँज से गूँज उठा बांदकपुर । प्रवक्ता वीरेन्द्र गौर ने बताया है कि  छटवें दिवस पर 70,000 से अधिक श्रृद्धालुओं के भोजन हुए एवं 80,000 से अधिक की संख्या में जनसैलाव बांदकपुर पुहंच शिवमय बन गया धमॅझेत्र ।
              महारूद्राभिषेक के  अवसर पर दद्दा जी ने महाआरती की है । गुरु मां ने भी महाआरती की है ।फिल्म अभिनेता राजपाल यादव सहित बड़ी संख्या में गुरु भाईयों ने आरती में भाग लिया है । राधे राधे मंडल सागर की झंकार का समा बंधा रहा ।
            *श्रावण मास के पवित्र अवसर दद्दा जी ने भी शिवलिंग निमार्ण किए । दद्दा जी के श्रीकमलों से गुरु भाई सुजीत सतना द्वारा बनाए गए छाया चित्रों का दद्दा जी ने लोकार्पण किया गया । लोकार्पण के अवसर पर दद्दा शिष्य मंडल के वरिष्ठ गुरु भाई वीरेन्द्र गौर प्रवक्ता , अशोक दीझित, मनु मिश्रा, संतोष गंगेले, राजू राय सहित स्थानीय लोगों ने भाग लिया है ।
            प्रवक्ता गौर ने बताया है कि 16 जुलाई को यज्ञ के समापन अवसर पर 1 लाख से अधिक श्रृद्धालुओ के  शामिल होने की संभावना है ।ट्रेनों की कटनी और सागर की ओर से आने वाली रेल गाड़ी के आते ही हजारों की संख्या में श्रृद्धालु उतरते हैं । सड़कों पर मानव जाम ऐसा लगा कि घंटों तक सड़कों पर पैदल निकलना भी दूभर हो गया । ऐसे जाम की चिंता न कर खुद जाम में फँसकर दद्दा जी ने भंडारा में पुहंच कर ही प्रसादी ग्रहण की है । भंडारा में भोजन प्रसादी परोसने वाले कार सेवक पसीना में नहाए हुए लग रहे थे । भंडारा देर रात्रि तक चलता रहा है । बांदकपुर के सभी तरफ की रोडों से 2 किलोमीटर दूर से वाहनों को रोक दिया गया और रोडों पर पैदल चलते सिर ही सिर नजर आ रहे थे।
         इस अवसर पर पूवॅ सांसद चंद्रभान सिंह, विधायक प्रताप सिंह जवेरा,अजय टंडन ,सिद्धार्थ मलैया,गुलाब सिंह राजपूत,रामजी लुहारी,देवेन्द्र फुसकेले  मनु मिश्रा,प्रदुम सिंह,वीरेन्द्र गौर,संतोष गंगेले, हाकिम सिंह, अखलेश हजारी, योगेश वाजपेयी, बब्बी तिवारी,गौरव पटैल सहित हजारों की संख्या में जनसैलाव उपस्थित रहे ।

     श्रीकांत मिश्रा