युवाओं की स्थिति रोजगार प्राप्त करने के लिए पात्रता सबसे बड़ी चुनोति

क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े लोगो की टिप्पणियों से यह बात सिद्ध होती है कि देश को वास्तव में युवा नेतृत्व की जरूरत है। लेकिन मौजूदा सरकार चाहे वो केंद्र की हो या राज्यों की दोनों ही सरकारों ने देश के वेरोजगार युवाओं को नोकरी एवं विकास के मुद्दे पर हाशिये में भी जगह न देने का काम बड़े ही तालमेल से किया है। मुफ्त में सुविधायें मुहैया कराने की नजाने कितनी योजनायें दोनों सरकारें आपसी तालमेल की बदौलत चला रही है। इन योजनाओं से लोगों का पेट तो भरा जा सकता है लेकिन एक अच्छी जिंदगी जीने में सहायक सिद्ध हो ऐसा कतई नहीं कहा जा सकता।

हर बार सरकारें नोकरियों के नाम पर युवाओं को नए नए पपलू दिखाती फिरती है। तरह तरह की डिग्री, डिप्लोमा, नए कोर्स (डीसीए पीजीडीसीए खत्म अब सीपीसीटी) की आज मार्केट में भरमार है। जिन्हें पाने की कोशिश में आर्थिक तंगी ओर परिवार की जिम्मेदारी का बोझ ढोने के बजाय मुट्ठीभर नियुक्ति के लिए लाखों रुपये खर्च कर देश का युवा देश का भविष्य या यूं कहें की सपनो का भारत(युवा) सरकारी नोकरियों के हिसाब से पात्रता प्राप्त करने में ही अपना यौवन खपा रहा है। विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है स्थिति ऐसी है कि किसी भी काम को पूर्णतः सम्पन्न करने में जरूरी स्टाफ की कमी से सरकारी कामकाज ठप्प पड़े है और लोग परेशान हो रहे है जिससे हम अपने ही राज्य को गर्त में जाता अपनी आंखों से देख रहे है। कहते है कि जब तक महँगाई नहीं बढ़ेगी तब तक देश/राज्य तरक्की नहीं करेगा लेकिन हमारे प्रदेश की स्थिति अतिरिक्त टेक्स की मार ओर महँगाई से दिनों दिन ओर लचर होती चली जा रही है। प्रदेश सरकार पर लाखों करोड़ रुपए का कर्ज उनके कार्यकाल की आधारशिला में हुए भ्र्ष्टाचार की कहानी बयां कर रहा है। सरकार कर्ज में रहती हैं लेकिन स्थिति भी बेहतर होनी चाहिए। शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर सरकार की स्थिति नगण्य ही कही जा सकती है। स्वास्थ विभाग की दुर्गति इसकी कहानी खुद कहती है, प्रदेश सरकार ने मध्यप्रदेश में खाली सैकड़ो की संख्या में डॉक्टरों के पदों के लिए विज्ञापन निकाला था जिसमे एम बी बी एस डॉक्टरों की मनमाफिक तनख्वाह के आधार पर नियुक्ति करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध थी लेकिन इसके बावजूद भी स्वास्थ विभाग के कई महत्वपूर्ण पद खाली ही राह गए।

राजनीतिक पार्टियों को युवाओं की जरूरत सिर्फ अपनी पार्टी की रैलियों ओर झंडे पकड़ाने तक ही सीमित है। युवाओं को यह बात समझनी चाहिए।

निश्चित ही यदि सरकारें रोजगार की बढ़ती समस्या के प्रति गंभीर नही हुई तो भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना किसी हॉलीवुड फिल्म की तरह ही होगा।

 

राजेन्द्र सेन