तंत्र के खिलाफ शिवराज के घर से ‘अगस्त क्रांति’ का आगाज

‘किसान बचाओ तिरंगा यात्रा’

पुष्पेन्द्र वैद्य

मध्यप्रदेश में शिवराज तंत्र से परेशान एक नौजवान सिहोर जिले से ‘अगस्त क्रांति’ का आगाज करने जा रहा है। सिहोर जिले के हमीदगंज से बकतरा तक करीब 140 किलोमीटर की पदयात्रा की शुरूआत 9 अगस्त को होगी। किसानों की बदहाली को केन्द्र में रखकर यह आवाज उठाई जा रही है। इस आंदोलन की अगुवाई सीएम के विधानसभा क्षेत्र बुधनी के ही एक गांव का नौजवान कर रहा है। अगस्त क्रांति के नाम पर इलाके में पर्चे बांटे जा रहे हैं। इसमें साफ लिखा गया है कि विकास का काम नहीं तो वोट नहीं। इस पदयात्रा के लिए किसानों को पर्चे के जरिए लामबंद किया जा रहा है। इस पदयात्रा का नाम ‘किसान बचाओ तिरंगा यात्रा’ दिया गया है।

हमीदगंज के रहने वाले अर्जुन आर्य किसानों की बदहाली को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। वे खुद एक किसान परिवार से हैं। किसानों की परेशानी को अच्छी तरह समझते हैं। बीते कई महीनों से अर्जुन इलाके के खस्ता हाल सरकारी तंत्र और किसानों की तमाम परेशानियों के खिलाफ सरकार को जगा रहे हैं। इलाके के सरकारी स्कूलों में बदइंतजामी है। कहीं बिल्डिंग नहीं है तो कहीं टीचर नहीं है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर गुणवत्ताहीन है। किसानों को पट्‌टे के लिए हर बार सरकार वादा करती है लेकिन उनकी आस पूरी नही हो रही। फसलों का उचित मुआवजा नहीं मिलता। फसल बीमा की किश्ते तो किसानों से वसूली जाती है लेकिन जब फसल खराब होती है तो बीमा की रकम नहीं मिलती। मंडियों में व्यापारी, बिचौलिए और अफसरों का गिरोह किसानों को लूट रहा है। यह सब उस इलाके में हो रहा है जहां 14 सालों से एक ऐसे शख्स को चुना जा रहा है जो प्रदेश का मुख्यमंत्री है। जब यहां ऐसी तस्वीर है तो बाकी मध्यप्रदेश के हालात समझे जा सकते हैं। मुख्यमंत्री कोरी घोषणाएं करते हैं। उनका क्रियान्वयन नहीं हो रहा। अर्जुन आर्य ने ‘अगस्त क्रांति’ के आगाज के लिए जो पर्चे छपवाए हैं उनमें इन्ही सब मुद्दों का जिक्र किया गया है। पर्चे में तमाम सारी मांगो के सामने लिखा गया है कि ‘काम नहीं तो वोट नहीं’।

पदयात्रा की शुरुआत 9 अगस्त गुरुवार की सुबह 9 बजे हमीदगंज से होगी। 140 किलोमीटर बकतरा पहुंचकर पदयात्रा का समापन किया जाएगा। यात्रा 50 गांवों से होकर गुजरेगी। गांवों तक पहुंचकर पीडितों से संपर्क कर उन्हें जागरुक करने के लिए नुक्कड सभाएं की जाएंगी।