प्यार करना कौंन सा गुनाह है ?

 

इस देश में हमें संविधान के तहित बहुत कुछ मौलिक अधिकार मिले है। और इस समाज के द्वारा भी हमें कुछ आजादी मिली है, फरबरी का महीना आता है और युवा पीढ़ी के दिलों में अच्छा लगने लगता है। क्योकि जो युवा प्रेम करना जानते है, जो दीवाने होते है उनका पर्व वेलेंटाइन डे 14 फरवरी आती है। जिसे हम प्रेमी युवाओं का बहुत बड़ा पर्व कहते है। इस दिन का इंतजार लोग बहूत बेसबरी से करते है, इस दिन को प्रेमी-प्रेमिका एक दूसरे को गुलाब (🌹) का फूल देकर अपने प्यार को सावित करते है। इस दुनिया में लोगो ने अलग-अलग क्षेत्रो में बहुत इतिहास रचे है, इसी तरह से लैला-मजनू, हीर-रांझा, सलीम-अनारकली, ऐसे कई दीवानो ने प्यार मुहब्बत में इतिहास रचा है। प्यार करना कोई गुनाह नही हैं क्योंकि मुहब्बत तो दिल से होती है। और इस दुनिया में मुहब्बत का ही तो खेल है। प्यार एक ऐसा नशा है जिसको हो जाये तो वह पत्थर को भी पिघला सकता है। इस देश में हर तरह के दिवस होते है, इसी तरह प्यार करने बालो का भी दिवस आता है और बो होता है वेलेंटाइन डे 14 फरबरी लेकिन इस दिन युवाओ के दिलों में खोफ भी रहता है। जो हमारे देश के एक दो संगठन है जो इस दिवस को मनाने नहीं देते है। यदि लड़का-लड़की पार्को में मिल जाये तो उन्हें मारते है। ठीक है वह इसलिये करते है क्योंकि भारतीय संस्कृति बरकरार रहे यानि शादी से पहले कोई इस तरह के संबंध नही बना सकता।लेकिन एक ओर देखा जाये तो यदि दोनों ओर से प्यार है तो इसमें किसी को क्या हर्ज है, यदि प्यार एकतरफा है और लड़का या लड़की एक दुसरे से जबरदस्ती करते है तो ये गलत है। इसे रोकना चाहिये। हां क्या भारतीय संस्कृति इसे आजादी नही देती तो प्यार तो प्राचीन काल से चला आ रहा है फिर बो क्या है, हमारा धर्म दूसरी शादी के खिलाफ है फिर हमारे प्राचीन राजाओं की दो-दो, तीन-तीन पत्नियां क्यों होती थी।फिर कृष्ण भगवान ने भी तो राधा से दिल लगाया था। क्या बो गलत था या सही। यदि ये संगठन

रोकना ही चाहते है तो फिर रोज बलात्कार होते है उनको रोकिये, में ये भी नही कहता की आप प्रेमियो को मत रोकिये लेकिन क्या जो व्यक्ति इन संगठनों से जुड़ें है उन्होंने कभी किसी से प्यार नही किया। यदि कोई ये बोलेगा की हां हमने प्यार नही किया, तो फिर यह भी कड़वा सत्य है कि बो लोग इस दुनिया में शायद है, ना के बराबर मिलेंगे जो शादी से पहले उन्होंने सम्बद्ध बनाये ना हो। तो फिर ये प्रोपेगेंडा क्यों। क्या शुर्खियों में आने के लिये। यदि यही मतलब है कि वेलेंटाइन डे विदेशयों का कल्चर है तो फिर आप चाय, नास्ता, कपड़े, भाषा सभी तो विदेशयों का उपयोग कर रहे हो छोड़ दो इन्हें लेकिन नही, तो फिर प्यार करना कौंन सा गुनाह है। में प्यार करने वालों के खिलाफ नहीं हूँ। ना ही प्यार करने वालों के पक्ष में। बस हमने कुछ प्रेमी-प्रेमिकाओं को इस वेलेंटाइन डे को मनाते देखा है। और उसी समय इसे ना मानने बाले विचारधारा के लोगो को इन प्रेमयों के प्रति किस प्रकार से सुलूक किया जाता है। इसे देख कर तंग रह जाता हूँ, मैं आर्टिकल नही लिखता लेकिन गन्दी-गन्दी गाली देना, लड़को को डंडो से मारना, बांधकर मारना, लड़कियों को मारना उनकी आबरू से खेलना, उनका वीडियो बनाना, उनको सरेआम बदनाम करना कहीं ना कंही ये गुनाह है। ये गलत भी है। इज्जत क्या होती है, यह एक पिता ही जानता है, लेकिन यदि उसकी बेटी की इज्जत सरेआम उछाली जाये ये कौंन सी संस्कृति है। यदि किसी पार्क में आप जैसी विचारधारा के व्यक्ति के लिए हमारे अपने लोग प्रेम करते मिल जाये तो वह भी वीडियो बनाएंगे, लड़का लड़की दोनों को मारेगें, उनकी इज्जत उछालेंगे तब आप पर क्या बीतेगी। नही पता? इसी तरह से उन लोगो पर भी बहुत कुछ बीतती है जिनकी इज्जत बाजार में नीलाम होती है। जो हमने लिखा है वह पूरे तथ्यों से और सोच समझ कर लिखा है। में ये नही कहता की खुलेआम प्यार होने लगे लेकिन में ये भी नही कहता की प्रेमी-प्रेमिकाओं को ढूढ़-ढूढ़ कर मारा जाये। उनकी इज्जत उछाली जाये।

 

✍- चंद्रभान सिंह लोधी

युवा कवि,अध्यक्ष-(अटल समाजसेवा युवा संगठन)