जी हाँ मेरे शहर में गुंडागर्दी नही होती

आलोचनाएं समीक्षाएं कितनी भी कर लो,लाख सवाल करो पर जो सच है उसे स्वीकार करो…सही को सही और गलत को गलत कहने का जज्बा रखो।
वाकई मेरे शहर में अब गुंडागर्दी नही होती अपहरण बलात्कार मेरे शहर की संस्कृति का हिस्सा नही बना कभी , जिसका मुझे फक्र है गर्व है।सारा देश अराजकता में जल रहा होता है साम्प्रदायिकता के तनाव बने हो देश मे , पर मेरे शहर की अमनो चैन गंगा जमुनी तहजीब पर कभी कोई आंच नही आई जिसका मुझे गर्व है।
हाँ मै दमोह मध्यप्रदेश का निवाशी हूँ यहां कोई भी ऐसा काम नही होता जिससे सर शर्म के मारे झुकाना पड़े।। अब आप कहेंगे इसका श्रेय या क्रेडिट किसे जाता है ….तो निश्चित रूप से यह अवाम आम जनता की ही देन है कि कभी मेरे शहर में दंगे नही होते बलात्कार नही होते अपहरण नही होते।जनप्रतिनिधियों के साथ साथ शासन प्रशासन के अधिकारियों कर्मचारियों को भी इसका क्रेडिट जाता है कि अभी तक मेरे शहर में ऐसी कोई घटना नही हुई।
पिछले कई वर्षों से गुंडागर्दी खत्म कर दी गयी..आज भी माताएं बहिने रात दस ग्यारह बजे तक बाजार से आती जाती रहती है कभी कोई शिकायत नही मिली…बाकी छोटे मोटे अपराध तो नगरीकरण की देन है जो शहरो के बसने के बाद से ही शुरू हो जाते है वो एक सतत प्रक्रिया है।
बेवाक राय