एक महिला विधायक अपनी ही सरकार में आखिर इतनी बेबस और लाचार क्यों हो गई ? अंदर की बात- बीजेपी विधायक नीलम मिश्रा और मंत्री के बीच क्यों छिड़ी जंग

अवैध उत्खनन और क़ब्ज़े को रसूख़ की तकरार
पुष्पेन्द्र वैद्य

सत्ताधारी बीजेपी की एक महिला विधायक विधानसभा में फूट-फूट कर रो पडी और गर्भगृह में आसंदी के सामने धरने पर बैठ गई। विधायक ने इलाके के रसूखदार काबिना मंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनसे अपनी और परिवार की जान का खतरा बताया। विधायक ने आशंका जाहिर की है कि एसपी की मिलीभगत से मंत्री उनके पति का एनकाउंटर करवा सकते हैं। एक महिला विधायक अपनी ही सरकार में आखिर इतनी बेबस और लाचार क्यों हो गई। इसी सवाल की पडताल में पता चला कि मंत्री और विधायक परिवार के बीच का झगडा पुराना है। मंत्री अपने वर्चस्व का इस्तेमाल कर कई बार विधायक और उनके परिवार पर शिकंजा कस चुके हैं। विधायक और उनके पति भी मंत्री के खिलाफ कई बार मोर्चा खोल चुके हैं। दरअसल ये लडाई एक ही जिले की दो सियासी शख्सियतों के बीच अवैध उत्खनन, जमीनों पर बेजा कब्जा और अवैध निर्माण से जुडा है। एक-एक कर सिलसिलेवार हम आपको उन घटनाओं से रु-ब-रु करवाएंगें जिसकी वजह से आज विधानसभा में सरकार के अपने ही घर में गृह क्लेश की कीच-कीच दिखाई दी।

रीवा जिले के सेमरिया विधानसभा से विधायक है नीलम मिश्रा। उनके पति अभय मिश्रा उनसे पहले बीजेपी से इसी सीट से विधायक रह चुके हैं अभय मिश्रा मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। वे बीजेपी से ही थे लेकिन दो महीने पहले वे कांग्रेस में शामिल हो गए। अब पत्नी बीजेपी की विधायक हैं और उनके पति कांग्रेस के नेता। रीवा से विधायक और उद्योग एंव खनिज मंत्री राजेन्द्र शुक्ल से मिश्रा दम्पत्ति के छत्तीस के आंकडे हैं। दरअसल ये लडाई सेमरिया इलाके में अवैध उत्खनन को लेकर शुरु हुई थी। विधायक नीलम का आरोप है कि मंत्री शुक्ल उनके इलाके में अवैध उत्खनन कराने वालों को संरक्षण देते हैं। मंत्री के पास खनिज विभाग हैं और वे खुद ही अवैध उत्खनन कराते हैं। मंत्री ने वक्फ बोर्ड की जमीन पर कब्जा कर रखा है। नाले की 4 एकड जमीन पर कब्जा कर फार्म हाऊस बना रखा है। मंत्री शुक्ल पर यह भी आरोप है कि उन्होंने चरनोई भूमि को निजी सचिव और रिश्तेदारों को नियम विरुद्ध आवंटित करवा दी।

मंत्री शुक्ल कभी मिश्रा दम्पत्ति के खिलाफ खुलकर तो सामने नहीं आए लेकिन उन्होंने पुलिस और प्रशासन को हथियार बनाकर इनके खिलाफ जमकर मोर्चा खोल रखा है। यह बात रीवा के गली-चौराहों पर जग जाहिर है। गांव की चौपाल से लगाकर शहर की चाय दुकानों तक मंत्री-विधायक के बीच की लडाई सास-बहू के झगडों की तरह आम है। दिसंबर 2016 में रीवा के सिरमौर चौराहे पर बन रहे नीलम मिश्रा के शापिंग कॉम्पलेक्स को अवैध करार देते हुए स्थानीय निकाय ने 20 लाख का जुर्माना ठोंक दिया था। इसके पीछे मंत्री शुक्ल ही थे।

नीलम मिश्रा के पति अभय मिश्रा मंत्री शुक्ल से परेशान होकर बीते डेढ दो सालों से बीजेपी में रहते हुए सरकार के खिलाफ ही आंदोलन करते रहे। बाद में वे कांग्रेस के साथ हो लिए। हाल ही में रीवा जिले के अकौनी गांव में एक आदिवासी की आत्महत्या के मामले में घटनास्थल पहुंचे थाना प्रभारी के साथ मारपीट का आरोप अभय मिश्रा और अन्य लोगों पर लगाया गया। बकायदा पुलिस ने उनके खिलाफ 9 गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। 24 जून को उन्हे गिरफ्तार करने के लिए रीवा रेल्वे स्टेशन को पुलिस ने इस तरह घेरा मानों किसी छुपे हुए आंकतवादी को पकडना हो। मिश्रा स्टेशन पंहुचे ही नहीं। वे कटनी स्टेशन पर ही उतर गए और पुलिस को खाली हाथ लौटना पडा।

मंगलवार को नीलम मिश्रा विधानसभा में बैठी थीं। इसी वक्त बैतूल से इंदौर जा रहे अभय मिश्रा को देवास जिले की नेमावर थाना पुलिस ने डिटेन कर लिया। जैसे ही नीलम मिश्रा को यह खबर मिली तो वो आपा खो बैठीं। शून्यकाल में नीलम सदन के भीतर ही फूट-फूट कर रोने लगी और अपनी ही सरकार के खिलाफ दनादन आरोप मढने लगी। नीलम ने मंत्री राजेन्द्र शुक्ल पर आरोप लगाया कि उनसे उन्हें और उनके पूरे परिवार को जान का खतरा है। मंत्री के इशारे पर पुलिस उनके पति का एनकाउंटर कर सकती है। यह कहते हुए नीलम आंसदी के सामने धरने पर बैठ गई। इस दौरान बीजेपी के विधायक इसे कांग्रेस की साजिश करार देते हुए अपनी ही विधायक के खिलाफ खडे दिखाई दिए तो कांग्रेसी महिला विधायक उनके साथ खडी दिखाई दीं। बाद में गृहमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी और उनके पति को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है। इस घटनाक्रम से 15 मिनट तक सदन की कार्रवाई स्थगित रही। बाद में नेता प्रतिपक्ष के साथ नीलम मिश्रा ने प्रेस के सामने आकर मंत्री और सरकार पर खुलकर आरोप लगाया।

विधायक नीलम मिश्रा ने यह लगाए आरोप-

– फरवरी 2017 को विधायक ने आरोप लगाया था कि स्थानीय मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने वक्फ बोर्ड की जमीन पर अवैध रुप से कब्जा जमा रखा है। सेमरिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत हरिहरपुर में पटपरी नाला के 4 एकड़ जमीन में फार्म हाऊस बना रखा है। इस संबंध में जांच कराने को कलेक्टर एवं मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था।

– दिसम्बर 2016 में सिरमौर चौराह स्थित उसके शांपिग काम्लेक्स को अवैध घोषित करवा कर 20 लाख रुपए जुर्माना जमा करवा गया है। इस मामले पर भी विधायक ने स्थानीय मंत्री पर बड़ा हमला बोला था।

– दिसम्बर 2017 में सेमरिया क्षेत्र के ग्राम पंचायत दादर तिहरा में चरनोई भूमि को मंत्री के निज सहायक एवं रिश्तेदारों को आंवटित करने का आरोप लगया था। उनका कहना था कि स्थानीय मंत्री के दबाव में कलेक्टर ने चरनोई भूमि नियम विरुद्ध तरीके से आवंटित की है।

– मई 2018 में विधायक ने मुख्यमंत्री व प्रदेश सगठंन मंत्री को पत्र लिखा था कि स्थानीय मंत्री के दबाव में भाजपा रीवा में प्राइवेट कंपनी की तरह काम कर रही है। यहां तक कि सेमरिया क्षेत्र में उनके द्वारा स्वीकृत कार्यो के भूमि पूजन व लोकार्पण में नहीं बुलाया जाता।