छोटे चुनावी नतिजों के बड़े मायने

 

धक्कामुक्की, झीनाझपटी, हल्ला-गुल्ला कांग्रेस का पर्याय बन चुका है

पुष्पेन्द्र वैद्य

इंदौर से सटा एक छोटा सा गांव तिल्लौरखुर्द। सुबह ढोल-तांसे, पटाखे और मिठाईयां धरी की धरी रह गई। सबकी तैनाती, सबके मोर्चे सोमवार की शाम ही तय कर लिए गए थे। जुलूस कहां से कहां निकलेगा….आतिशबाजी कहां होगी….मिठाईयां कहां और कैसे बटेगी। लेकिन सब पर पानी फिर गया। सारी तैयारियां धरी की धरी रह गई। बीजेपी के हर नेता के हिस्से में दो-दो गांव बांट दिए थे। कांग्रेस बटी हुई थी। बीजेपी के साथ भारी भीड थी। बीजेपी अतिउत्साह में थी। जिला पंचायत इंदौर के वार्ड क्रमांक 3 पर हुए उपचुनाव का मंगलवार को नतीजा आया तो हर कोई चौंक गया। नतीजों के मुताबिक कांग्रेस ने जीत दर्ज कराई। चुनाव बहुत छोटा था। लेकिन ताकतें बडी-बडी लगी थीं। बीजेपी ने जिस नेता को कई राज्यों की बागडोर सौंप रखी हों ऐसे बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और उनकी पूरी टीम ने जिसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया हो ऐसे में उन्हें इस छोटे से चुनाव में कांग्रेस ने आईना दिखा दिया। तिल्लौरखुर्द की तरह ही और भी कई नगरीय निकाय हैं जहां मंगलवार को उपचुनाव के अप्रत्याशित नतीजे आए। बीजेपी के लिए ये नतीजे अमंगलकारी साबित हुए। प्रदेशभर में 14 उपचुनाव नतीजों में से 9 पर कांग्रेस, 4 पर बीजेपी और 1 पर निर्दलिय ने जीत दर्ज कराई।

ऐन विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उपचुनावों ने इन नतीजों ने बीजेपी की मुश्किलें बढा दी है। कांग्रेस भले ही दिशाहीन हो लेकिन जनता का बदलता मुड प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को तेजी से बदल रहा है। बीजेपी भले ही आत्मविश्वास से भरपूर हों लेकिन भीतर ही भीतर आशंकाओं से घिरी हुई है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जनता से आशीर्वाद लेने के लिए प्रदेश की सभी 230 विधानसभाओँ में अपना इम्पोर्टेड रथ लेकर घूम रहे हैं। मर्सडीज बेंज की भारतीय कंपनी भारत बेंज की नई बस को रथ का स्वरुप देकर शिवराज 55 दिनी यात्रा पर जनता का मूड भांप रहे हैं। भीड तो जबर्दस्त हो रही है। बीजेपी मीडिया सेल हर दिन मीडियाकर्मियों और सोशल मीडिया में इन तस्वीरों को जमकर फैला रही है। अनुशासन और संगठन के लेबल पर सशक्त बीजपी के उपर से लबरेज दिख रही हैं लेकिन भीतर ही भीतर कई तरह के सबकुछ ठीक नहीं होने की खबरें छन-छन कर आ रही है।

कांग्रेस के भीतर हर दिन जूतमपेजार हो रही है। धक्कामुक्की, झीनाझपटी, हल्ला-गुल्ला कांग्रेस का पर्याय बन चुका है। कांग्रेस प्रभारी दीपक बाबरिया को कार्यकर्ताओं से यह कहना पढा कि अनुशासन का पाठ आरएसएस से पढा जाए। कांग्रेस के निमाड के कार्यकारी अध्यक्ष बाला बच्चन ने कहा कि कांग्रेस शिवराज की जनआशीर्वाद यात्रा का मुकाबला नहीं कर पा रही है। कांग्रेस की गुटबाजी पिछले चुनावों की तरह ही बरकरार है। अपने-अपने इलाकों में कांग्रेस के कार्यकर्ता उन्ही के क्षत्रपों के नाम के झंडे-डंडे उठाए घूम रहे हैं। बीजेपी ने संगठन स्तर पर चुनाव की माइक्रोप्लानिंग शुरु कर दी है लेकिन कांग्रेस अभी हवा में ही तैरती नजर आ रही है। जनआशीर्वाद यात्रा के बदले कांग्रेस ने जनजागरण यात्रा शुरु तो की लेकिन कांग्रेस के रथ का टायर यात्रा शुरु होने से पहले ही पंचर हो गया। कर्नाटक में कांग्रेस का राजतिलक करने के बाद मध्यप्रदेश पंहुचा रथ कमलनाथ के बंगले के पीछे खडा हुआ है। ये रथ चलने को तैयार है मगर कोई सारथी नजर नहीं आ रहा। बीजेपी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेस कैंप की तैयारी मध्यप्रदेश में शुरु कर दी लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का एमपी रोडमेप अभी तैयार नहीं हुआ।

बीते दिनों मध्यप्रदेश के कई मंत्रियों और विधायकों को इलाकों में जनता के विरोध का सामना करना पडा। बीते 15 सालों से राज्य में बीजेपी की सरकार है। मालवा की एक कहावत है ‘टीके की बखत करम बांका करना’ यह कहावत इस वक्त कांग्रेस के लिए फीट नजर आती है। 15 साल का एंटी इंकम्बेंसी फेक्टर कुछ हद तक काम कर सकता है। एक ही चेहरे से कुछ लोग बोर भी हो चुके हैं। किसान फसलों का दाम नहीं मिलने और नौजवानों को रोजगार नहीं मिलने से गुस्सा बरकरार है। मंगलवार के इन नतीजों को यदि सेमीफायनल माना जाए तो बीजेपी के लिए यह खतरे की घंटी है लेकिन कांग्रेस की फूट बीजेपी को रिटर्न गिफ्ट दे सकती है।