बुन्देलखंड की विरासत, जिन्होंने इस नृत्य के खातिर अपना जीवन तक की परवाह नहीं की

बुन्देलखंड के विलुप्त हो चुके नृत्यों में से एक “भांड नाच” के इकलौते नर्तक  53 वर्षीय दयाल पटैल ग्राम मेहलवारा तहसील पथरिया जिला दमोह के एक किसान है, जिन्होंने इस नृत्य के खातिर अपना जीवन तक की परवाह नहीं की,

“भांड नृत्य” बुन्देलखंड की विलुप्त लोक कलाओं में से एक है, जिसे अविवाहित युवा अपने मनोरंजन के लिए किया करते थे , जिसे पांव म घुंघरू बांधकर एंव रग बिरंगी पोशाक पहन कर किया जाता है ।

दयाल पटैल यह लोक नृत्य बचपन से करते आ रहे हैं , चाहे देवी विसर्जन हो, लोक गायन , विवाह आदि में ये नि:संकोच अपनी कला का प्रदर्शन करते है ।

दयाल पटैल जैसे कलाकार आज भी बुन्देलखंड की लोक कला को जिवित रखे हुए हैं , निश्चित ही समस्त बुन्देलखंड के लिए एंव आने वाले कलाकारों के लिए यह प्रेरणा स्रोत हैं ।

वर्षों से लोक कला की सेवा करते हुए दयाल कहते हैं कि वो आगे भी इस कला को जीवित रखना चाहते हैं किन्तु आज कल के युवा इन लोक कलाओं को अर्थहीन समझतें हैं वे केवल पश्चिमि सभ्यता एवं बाॅलीवुड  में फिल्म के सपनों फसकर  अपनी लोक संस्कृति को भूलते जा रहे हैं।

53 साल की इस उम्र में भी इतनी ऊर्जा के साथ पांव में घुंघरू एवं रंग-बिरंगी पोशाक पहन कर जब दयाल पटैल  नृत्य करतें हैं तो आजकल के युवा भी हैरान रह जाते हैं ।

दयाल , ” रामसेवक किसान लोक कला विकास समिति” मेहलवारा के उपाध्यक्ष पद पर हैं एवं बुन्देलखंड की लोक कलाओ की निरंतर सेवा कर रहे हैं ।

निरपत {आकाश } सेन मेहलवारा तहसील पथरिया जिला दमोह