अनंत अटल यात्रा..

कविता

नंत अटल यात्रा……………………………………….

हे अटल जी राष्ट्र वंदन करना हमें सिखा दो

भारत के कण-कण में यह भावना जगा दो।।

         आपका ये समर्पण जो राष्ट्र को है तन मन,

उस भावना को जग मे हर जन जन में अब जगा दो।।

साधारण से असाधारण कैसे बना जाता है,

कैसी ये युक्ति थी ये अब कोई हमें बता दें।

अटल जी अटल रहेंगे अटल कहीं नहीं जाते,

सूक्ष्म रूप में ही मन मन में घर बना दो।।

खोया है एक वक्ता, कवि कुशल एक प्रशासक,

यह भरपाई कैसे होगी, अब यें हमें बता दें।।

लाल देश के थे और लाल के सखा थे,

आपके राष्ट्र चिंतन को हर कण-कण में अब जगा दो।।

क्या राष्ट्र का था चिंतन, क्या राष्ट्र भावना थी,

ऐसे में क्या सांत्वना हो, ये कोई तो बता दो।।

मृत्यु पर सदा गाया और साथ हो लिए तुम,

‘‘कब मौत से ठन गई’’, यें भी तो हमें बता दो।।

एक सूत्र में राष्ट्र बांधा, क्या शक्ति थी वो आप में। 

ऐसा फिर कैसे होगा, ये राज तो बता दों।।


इंजीनियर ललित धर द्विवेदी

कार्यपालन यंत्री

नगर पालिक निगम, कटनी (म.प्र)