नर्मदा भक्त राधिका पटैल से शिव भक्तो ने की भेट

 8 आई ए एस बनाने के बाद शुरू की नर्मदा परिक्रमा यात्रा

 दमोह – बांदकपुर-देश सेवा का लक्ष्य आई ए एस से लेकर नर्मदा परिक्रमा तक देश सेवा और मानव कल्याण की ऐसी भावना की पहले प्रशासनिक सेवा की प्रतियोगी परीक्षाएं दी, मगर सफल नही हुए तो 5 साल में 8 विधार्थियों को अपने मार्गदर्शन में उन्ही परीक्षाओं में उत्तीर्ण कराया और फिर लिया संन्यास.  ब्रह्म्चर्य का व्रत करते हुए जनकल्याण और समृद्ध भारत की कामना के साथ निकल पड़ी 3300 कि.मी. की पैदल नर्मदा परिक्रमा यात्रा में….

नाम है राधिका पटेल जन्म हुआ मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले मे माँ नर्मदा की गोद में ,जन्म के साथ ही मा नर्मदा के प्रति प्रगाढ़ श्रद्धा और प्रेम का भाव जागृत हो चुका था. बचपन के संस्कार और माँ नर्मदा के प्रति आस्था ने उन्हें जनकल्याण भावना ओत-प्रोत रखा.और इसी भावना ने निःस्वार्थ भाव से अपने लक्ष्य के प्रति आगे बढ़ने का हौसला दिया.

देश सेवा के उद्देश्य से प्रशासनिक सेवा की तैयारियों में जुटी रही. आई ए एस की मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण कर लिया मगर साक्षात्कार में बाहर हो गयी. अपने सपनों की नौकरी हाथ से छूट जाने के बाद भी निराश नही हुयी बल्कि और मजबूती से अपने मुख्य लक्ष्य ओर बढ़ने लगी और देश की राजधानी दिल्ली के बड़े बड़े कोचिंग इंस्टिट्यूट में अपनी सेवाएं दी और छात्रो का मार्गदर्शन अपने अनुभवों के आधार पर किया.इसके बाद अपना स्वयं का संस्थान स्थापित करते हुए 5 साल में 8 विद्यार्थियों को उनके लक्ष्य तक पहुंचाया.और एक सच्चे गुरु की भाँति अपनी असफलता को अपने छात्रों की सफलता के पीछे कर अपनी शिक्षा को सार्थक बना दिया.

ऐसा नहीं की राधिका ने सिर्फ किताबी ज्ञान ही हासिल किया बल्कि वो कला और खेल में भी पारंगत हैं. जहाँ एक ओर सितार वादन से उन्होंने एम ए की डिग्री प्राप्त की. वही कराटे में भी वो ब्लैक बेल्ट हैं.दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास ही राधिका के जीवन का सार तत्व है.

इसके बाद शुरू हुई राधिका की नर्मदा परिक्रमा यात्रा. जिसका आरन्भ किया गया नर्मदा उद्गम स्थल अनुपपुर जिले के अमरकंटक से. इस यात्रा में राधिका (40 वर्ष ) के साथ उनके छोटे भाई नीलम सिंह (38 वर्ष ) भी शामिल हैं.इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जनकल्याण और समृद्ध भारत की मंगल कामना है,इसके अलावा नर्मदा नदी के घटते जल स्तर और नर्मदा नदी बढ़ते प्रदूषण को लेकर लोगों को जागरुक करना हैं.

राधिका का कहना है की

परिक्रमा का मुख्य उद्देश्य मानव उत्थान से भारत उत्थान करना व पर्यावरण जागरुक आम जन मानस की सुप्त चेतना को जगाकर ही भारत विश्व गुरु बनेगा. उसमे मेरे जीवन का कुछ अंश काम आ सके तो जीवन को धन्य समझूंगी. नर्मदा भक्त राधिका पटेल की इतनी तेज धूप  पैदल व नंगे पैर की जा रही नर्मदा परिक्रमा की चर्चा पूरे प्रदेश मे की जा रही है। राधिका पटेल विगत 18 जनवरी से नर्मदा परिक्रमा मे हैं। इनकी यात्रा 15 जून को संपन्न होगी। जानकारी के अनुसार अमरकंटक से प्रारंभ हुई मां रेवा की परिक्रमा 03 जून को जबलपुए गोरीघाट  घाट पहुंची।

जहाँ  राधिका ने अपने यात्रा अनुभव

साझा करते हुए बताया कि कलियुग मे मां नर्मदा ही मोक्षदायिनी व सिद्धीदात्रि हैं। मेरे द्वारा देश और समाज को जानने के साथ समाज कल्याण के लिए यह यात्रा की जा रही है। यात्रा के दौरान जो अनुभव मिले हैं अपने जीवन में उतारने के साथ लोगों को संदेश देना चाहती हूं कि मां नर्मदा का संरक्षण करने के साथ घाटों को साफ सुथरा रखें एवं हरा-भरा रखने व कटाव रोकने के लिए पौधरोपण भी करें। दिल्ली के मुखर्जी नगर में आईएएस अकादमी चलाने वाली साहसी राधिका पटेल कहती हैं कि युवाओं को भौतिकता से ज्यादा हमारी भारतीय आध्यात्मिक व सामाजिक संस्कृति की ओर प्रेरित करना बेहद जरूरी हो गया है इस अवसर पर बांदकपुर से शिव भक्त शंकर गौतम ,अमित दुबे,अजय ठाकुर,मोनू सैनी जबलपुर में उपस्थित रहे