मंत्री बनकर भी सेवक की तरह कर रहीं जनसेवा

जन्मदिन पर खास:
जमीन से जुड़कर सेवक की तरह सेवा को अपना धर्म बनाने वाली श्रीमती ललिता यादव मंत्री बनकर भी सेवाधर्म के वृत का निर्वाह करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहीं हैं। नगर पालिका के रास्ते विधानसभा का सफर तय करने वालीं एक गरीब परिवार की बेटी ललिता यादव ने संघर्ष करते हुए जनसेवा की राह चुनी। उनके इसी सेवा भाव व कर्तव्य निष्ठां को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें छतरपुर जिले के बजाए पूरे प्रदेश की सेवा की जिम्मेदारी सौंपकर मंत्रिमंडल में स्थान दिया है। प्रदेश शासन में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, घुमक्कड़ व अर्द्धघुमक्कड़ कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री का दायित्व मिलने पर श्रीमती ललिता यादव मध्य प्रदेश की सेवा कर ही रहीं हैं उन्होंने अपने छतरपुर विधानसभा क्षेत्र का भी पूरा ध्यान रखने में कसार नहीं छोड़ी है। 22 अपै्रल 1962 को सागर जिले के राजा बिलहरा गांव में लक्षमन सिंह यादव के घर जन्मी ललिता यादव की जिंदगी का सफर बड़ा संघर्षपूर्ण रहा है।

श्रीमती ललिता यादव अपने संघर्ष और गरीबी के दिनों को छिपाती नहीं है। विभिन्न कार्यक्रमों में वे मंच से खुद पूरी कहानी बयां करतीं हैं। उनका संघर्ष भारतीय खासकर पिछड़ा वर्ग में महिलाओं की हालत बताता है। ललिता यादव ने बीड़ी बनाकर अपनी शिक्षा जारी रखी। पढाई के जूनून के दौरान ही उनका विवाह चरखारी में हरिप्रकाश यादव के साथ हो गया लेकिन उन्होंने एक पत्नी और माँ का दायित्व निभाते हुए भी अपनी शिक्षा जारी रखी और एमए, एलएलबी तक पढ़ाई की। उन्हें पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने छतरपुर में वार्ड पार्षद का टिकट दिया लेकिन वे सफलता हासिल नहीं कर सकीं। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और भाजपा में लगातार सक्रिय बनी रहीं। पार्टी ने उनकी निष्ठा और लगन को देखते हुए नगर पालिका अध्यक्ष का टिकट दिया और वे पार्टी तथा नागरिकों की उम्मीदों पर खरी उतरीं। नगर पालिका की पहली महिला अध्यक्ष बनकर उन्होंने शहर की गली-गली में विकास की इबारत लिख दी। ललिता यादव के विकास कार्यों से प्रभावित होकर क्षेत्र के लोगों ने उन्हें नगर पालिका अध्यक्ष के बाद छतरपुर विधानसभा क्षेत्र का विधायक चुन लिया। उन्होंने शहर में जो विकास कार्य कराए उसका लाभ ग्रामीण क्षेत्रों को दिलाने में जी-जान लगा दी। ललिता यादव ने विधायक की जिम्मेदारी निभाते हुए शहर और गांव में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी इसी निष्ठा और लगन को देखते हुए जनता ने दोबारा ललिता यादव को विधायक के चुनाव में जितवा दिया। क्षेत्र की जनता के आशीर्वाद और सेवाभाव को देखते हुए वर्ष 2016 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें राजयमंत्री बनाया गया।
विधायक रहने के दौरान ललिता यादव ने क्षेत्र के विकास के लिए राज्य शासन से करोड़ों का बजट दिलवाया जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक़ें, ग्रामीण विकास, पेयजल, सिंचाई के नए-नए काम प्रारंभ हो सके। अब तो वे खुद शासन का अंग है और क्षेत्र के विकास की आवाज केबिनेट में पूरी वजनदारी से उठातीं आ रहीं हैं। राज्यमंत्री बनने के बाद भी उनका क्षेत्र के लोगों से सतत संपर्क बना हुआ है और वे प्रदेश के साथ ही क्षेत्र के दौरों के लिए समय निकल लेतीं हैं। उन्होंने विधायक बनने पर आपकी विधायक आपके द्वार, बेटी है तो कल है, सुंदरकांड पाठ जैसे अनेक अनूठे अभियान चलाए। क्षेत्र के युवाओं की खेल प्रतिभा निखारने के लिए ललिता यादव ने अपने स्वर्गवासी पति हरिप्रकाश यादव (नन्ना जी) की स्मृति में विधायक कप ट्राफी टूर्नामेंट प्रारंभ किया। इसी की तर्ज पर प्रदेश शासन ने हर विधानसभा क्षेत्र में विधायक कप खेल शुरू कर दिए है। तपती धूप हो या बरसता पानी या फिर कड़ाके की ठंड सेवा के लिए संघर्ष का उनका यह सफर कभी रुकता नहीं है। जन्म दिवस के मौके पर भी वे घर नहीं बैठीं बल्कि ग्राम उदय से भारत उदय अभियान और किसानो की खुशहाली के लिए चल रहे कृषि क्रांति रथ के लिए गांव-गांव का दौरा कर रही हैं। जन-जन की सेवा में वे थकती नहीं हैं, दिन हो या रात आमजन की पीड़ा सुनकर उनके कदम चल पड़ते हैं। वे अपने आपको जन-जन की सेवक कहती ही नहीं हैं बल्कि काम करके दिखाती हैं। उनका कहना रहता है कि किसी को कोई कष्ट हो वह कभी भी उनके पास आ सकता है, लोगों की पीड़ा दूर करने में ही उन्हें सुकून मिलता है।

पप्पू गुप्ता