आखिर क्यों आजीविका मिशन दमोह बना रहा डाक्टर्स के लिए सुरक्षा कवच स्व सहायता समूहों की महिलाएं बना रहीं मास्क, सेनेटाइजर, पी पी ई किट और कोरोना सेफ्टी सूट

दमोह : कोराना वायरस से बचाव के लिए सम्पूर्ण देश मे अपने-अपने स्तर पर प्रयास चल रहे हैं। विभिन्न प्रकार की शासकीय एवं गैर शासकीय संस्थाएं सहायक सामग्रियों की आपूर्ति हेतु दिन रात मेहनत कर रहीं हैं तथा अस्पताल प्रबंधन को सुरक्षा उपकरण और संदर्भ सामग्री की आपूर्ति और फील्ड वर्कर्स को वांछित सुरक्षा सामग्री की कमी से दो चार होना पड़ रहा है। कोरोना महामारी से बचाव के लिए दमोह जिले मे जिला प्रशासन ने समस्त आवश्यक प्रबंधन में सारी शक्ति झोंक दी है और प्रयासों की इसी कड़ी में शामिल है, आजीविका मिशन के माध्यम से वायरस के रोकथाम हेतु आवश्यक सहायक सामग्री जैसे काटन बेस्ड वाशेबिल थ्री प्लाई मास्क, सेनेटाइजर, पी पी ई किट और कोरोना वायरस सेफ्टी सूट, फील्ड वर्कस हेतु सेफ्टी गाउन जैसी सहायक सामग्रियों का निर्माण और आपूर्ति। उल्लेखनीय है कि जिला कलेक्टर तरुण राठी और मुख्य कार्यपालन अधिकारी गिरीश मिश्रा के प्रयासों से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी श्रीमती तुलसा ठाकुर और सिविल सर्जन श्रीमती ममता तिमोरी के तकनीकी निर्देशन तथा जिला परियोजना प्रबंधक श्याम गौतम के प्रबंधन मे आजीविका मिशन के स्वसहायता समूह उक्त सामग्रियां तैयार कर रहे हैं।

       थ्री प्लाई सर्जिकल मास्क: जिले में कुल 16 केन्द्रों में 72 स्वसहायता समूहों की 156 सदस्याएं निरंतर सर्जिकल मास्क बनाने का कार्य कर रहीं हैं। काटन बेस्ड फेब्रिक पर तैयार किए जाने वाले वाशेबिल मास्क की लागत लगभग छः रु. आती है और 10 रु. में जन सामान्य एवं विभिन्न विभागों को उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 90 हजार से अधिक मास्क स्वसहायता समूहों की दीदियों द्वारा तैयार कर विक्रय किए गए हैं जिसके माध्यम से लगभग 90 हजार लोगों को सीधे ही सस्ते एवं सुलभ मास्क प्राप्त हो सके एवं 156 दीदियों को दस बारह दिनों मे 3 से 4 हजार रु. की आय घर बैठे हो चुकी है।

       सेनेटाइजर: जिले के दमोह विकासखण्ड में चार स्वसहायता समूहों की 22 सदस्याएं सामुदायिक प्रशिक्षण केन्द्र मे सेनेटाइजर निर्माण का कार्य कर रहीं हैं। सेनेटाइजर निर्माण हेतु वल्र्ड हैल्थ आर्गेनाइजेशन द्वारा सुझाए गए फार्मूले पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तकनीकी मार्गदर्शन दे रहीं है। सेनेटाइजर निर्माण हेतु प्रमुख अवयव एथिल एल्कोहल (स्प्रिट) जिला प्रशासन के सहयोग से आबकारी विभाग द्वारा उपलब्ध कराया गया एवं अन्य समस्त रसायन जैसे हाइड्रोजन पैराक्साइड, ग्लिसरोल, रोज वाटर आदि स्थानीय मेडिकल स्टोर्स से प्राप्त की गईं।

       स्वसहायता समूहों द्वारा अब तक 3000 लीटर अर्थात लगभग 45 हजार शीशियां तैयार करके जिला चिकित्सालय, महिला एवं बाल विकास विभाग, नगर पालिका परिषद, जनपद पंचायतों एवं मिशन अस्पताल सहित जन औषधि केन्द्र के माध्यम से जन सामान्य को उपलब्ध कराई गईं हैं। एक लीटर सेनेटाइजर तैयार करने मे 200 रु. की लागत आती है और समूह द्वारा 05 लीटर पैकिंग 280 रु. प्रति लीटर एवं विभिन्न साइज की पैकिंग में 350 रु. प्रति लीटर की दर से विक्रय किया जाता है इस प्रकार स्वसहायता समूहों द्वारा तीन लाख से अधिक राशि अर्जित की गई है और जन सामान्य को सस्ते एवं गुणवत्ता युक्त सेनेटाइजर सुलभ कराए गए हैं।

       पी पी ई किट: आजीविका मिशन के जिला स्तरीय सामुदायिक प्रशिक्षण केन्द्र मे स्थापित की गई कार्यशाला में पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमैण्ट्स (पी पी ई ) किट तैयार की जा रहीं हैं। मिशन द्वारा तैयार किट में शामिल हैं सर्जन किट जो कि 90 जी एस एम के नान वावेन फेब्रिक पर तैयार की जा रही है। किट में शामिल है लांग गाउन, हैड हुड, शूज कवर, सिंगल पेयर पैंकिंग ग्लब्ज, सर्जिकल मास्क और जीरो पावर का चश्मा। मिशन द्वारा उक्त किट मात्र तीन सौ रु. में तैयार की गई और चिकित्सकीय अमले को उपलब्ध कराई जा रही हैं। मिशन के पास मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी दमोह से 400 नग जिला चिकित्सालय से 300 नग, जिला चिकित्सालय भोपाल से 300 नग आर्मी होस्पीटल सागर से 300 नग सहित मिशन हास्पीटल एवं अन्य प्रायवेट हास्पीटल से 500 नग पी पी किट के क्रय आदेश दिए गए हैं। एक पी ई किट तैयार करने मे लगभग 280 रु. की लागत आती है जिसे 300 रु. की दर पर चिकित्सालयों एवं डाक्टर्स को उपलब्ध कराया जा रहा है।

       कोरोना प्रोटेक्शन थ्री लेयर सूट: सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डाॅ ममता तिमोरी एवं वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. दिवाकर पटेल के निर्देशन मे मिशन द्वारा कोरोना वायरस से सुरक्षा हेतु थ्री लेयर का फुल बाडी कवर सूट तैयार किया गया है। उक्त सिंगल पीस सूट में अन्दर और बाहर की परत में 90 जी एस एम नान वावेन फेब्रिक का उपयोग किया गया है और दोनो परत के बीच मे एक परत प्लास्टिक की डाली गई है और चेहरे को कवर करने हेतु प्लास्टिक के पारदर्शी शीट से फेस कवर शील्ड बनाई गई है। उल्लेखनीय है कि उक्त तीन परत सुरक्षा वाले सूट जिसमें बीच में प्लास्टिक शीट डाली गई है, के माध्यम से वायरस संक्रमण की संभावना न्यूनतम हो जाती है। विभिन्न चिकित्सालयों द्वारा कोरोना प्रोटेक्शन थ्री लेयर सूट की 2000 से अधिक की मांग आ चुकी है जिसमें से 400 की पूर्ति की जा चुकी है। एक सूट को तैयार करने मे लगभग 650 रु. की लागत आती है जिसे 700 रु. में डाक्टर्स को उपलब्ध कराया जा रहा है।

       लाँग गाउन- मिशन की महिलाओं द्वारा काटन बेस्ट वाशेबिल फेब्रिक पर लाँग गाउन तैयार किए गए हैं जिसके साथ हेड कवर भी है। उक्त गाउन फील्ड वर्कर्स के लिए उपयोग में आ रहे हैं। इन गाउन्स का फायदा यह  है कि इनसे पूरा शरीर ढंक जाता है और अंदर के कपड़ों तक संक्रमण नही पहुंचता है कर्मचारी शाम को घर पहंुचने पर बाहर ही उक्त गाउन उतार कर घो सकता है जिससे संक्रमण की संभावना को कम किया जा सकता है।

       अन्य जिलों को भी आपूर्ति: आजीविका मिशन द्वारा न केवल दमोह जिले के विभिन्न विभागों को सहायक सामग्रियों की आपूर्ति की गई बल्कि अन्य जिलों को भी सहयोग किया गया है। भोपाल जिले में 300 पी पी ई किट, सागर जिले मे आर्मी हास्पिटल मे 300 किट सतना जिले में 500 किट नरसिंहपुर जिले में यूनियन बैक आफ इण्डिया के लिए 50 लीटर सेनेटाइजर एवं 300 नग मास्क आदि की आपूर्ति की गई है।

       कोरोना की महामारी से निपटने में मुख्य आवश्यकता मास्क और सेनेटाइजर्स की आपूर्ति की थी। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डा. गिरीश मिश्रा के मार्गदर्शन मे आजीविका मिशन को उक्त आपूर्ति हेतु समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई। आजीविका मिशन के प्रयासों से जिले में मास्क और सेनेटाइजर्स की आपूर्ति निरंतर बनी रही जिससे विभिन्न विभागों को आसानी से उपलब्धता हो सकी एवं जन सामान्य को सस्ते मास्क और सेनेटाइजर उपलब्ध होने से काला बाजारी पर रोक लग सकी। मिशन के स्टाफ ने आगे बढ़कर पी पी ई किट जैसी सामग्रियों का भी निर्माण किया जो कि न केवल जिले के अस्पतालों की कमी को पूरा कर पाया बल्कि समूह की महिलाओं की आजीविका में भी सहायक सिद्ध हुआ।

       डा. गिरीश मिश्रा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी- जिला पंचायत: जिला प्रशासन कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए प्रमुख आवश्यक सामग्रियों जैसे सेनेटाइजर्स और मास्क की आपूर्ति को लेकर चिंतित था लेकिन मेरे साथ आजीविका मिशन की टीम ने स्वसहायता समूहों की 200 से अधिक महिलाओं के सहयोग से उक्त आपूर्ति को बनाए रखा और जिले ने कमी की समस्या से निजात पाई। बरिष्ठ डाक्टर्स के मार्गदर्शन में मिशन की महिलाओं ने कोराना सेफ्टी सूट जैसी किट तैयार कर मिशाल कायम की और लाक डाउन की विषम परिस्थिति में मिशन के स्टाफ और स्वसहायता समूहों की सदस्याओं ने बेहतर प्रयास किए जिसके लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं । 

       डा. तुलसा ठाकुर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी: जिले मे चिकित्सा अमला विभिन्न सामग्रियों की कमी से परेशान था हमारे फील्ड वर्कर्स को ड्यूटी के दौरान संक्रमण से बचाने की चिंताएं भी थी। जिला प्रशासन के सम्मुख जब हमने उक्त चिंताएं व्यक्त कीं तो प्रशासन द्वारा आजीविका मिशन के सहयोग से पी पी ई किट, कोरोना सेफ्टी सूट और लोंग गाउन की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है निश्चित रुप से उक्त प्रयासों से हमें चिकित्सकीय कार्य में सहयोग मिल पा रहा है।

       डा. ममता तिमोरी, सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक: हमारा चिकित्सालय कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव हेतु काफी चिंतित है और चिकित्सक किसी बेहतर सुरक्षा उपकरण की तलाश में थे, वरिष्ठ चिकित्सक श्री दिवाकर पटेल ने आजीविका मिशन के डी पी एम श्री श्याम गौतम को कोरोना सेफ्टी सूट के बारे मे चर्चा की और उनके समूहों के सहयोग से थ्री लेयर फुल बाडी कवर सूट तैयार किया गया जो कि संक्रमण से बचाव मे काफी हद तक सहायक सिद्ध हो सकता है।

       ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार के 01 अप्रेल के ट्विटर वाल पर म.प्र. के स्वसहायता समूहों की दीदियो के सेनेटाइजर्स और फेस मास्क बनाने के प्रयासों की सराहना की गई। उक्त ट्वीट के साथ शेयर की गईं समस्त फोटो आजीविका मिशन दमोह की हैं। मिशन मे दिनरात आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति में जुटीं दींदियां निश्चित रुप से उक्त पहचान पाने पर उत्साहित हुईं और दोगुनी क्षमता से निर्माण कार्य में जुट गईं हैं। कोरोना महामारी से संघर्ष मे म.प्र. राज्य आजीविका मिशन के स्टाफ और स्वसहायता समूह की दीदियों ने जिस लगन और परिश्रम से सहयोग किया है वह इस विषम परिस्थिति में शासन प्रशासन और जन सामान्य के लिएं संजीवनी साबित हो रहा है।

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