शासकीय कर्मचारी प्रशासन का दिल, अंतर्रात्मा और दोनों हाथ हैं

शासकीय कर्मचारियों द्वारा मुख्यमंत्री का सम्मान एवं आभार

भोपाल-मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शासकीय कर्मचारी प्रशासन का दिल, अंतर्रात्मा और दोनों हाथ हैं। सरकार द्वारा कर्मचारियों के हितों के लिये निरंतर कार्य किये गये हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने कर्मचारियों को अपने परिवार की तरह ही समझा है। भविष्य में भी निरंतर कर्मचारियों के कल्याण के कार्य किये जायेंगे। शासकीय कर्मचारी और सरकार मिलकर प्रदेश को समृद्ध और विकसित बनायेंगे। मुख्यमंत्री  शनिवार को उज्जैन में प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मान एवं आभार कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों के विभिन्न 45 संगठनों द्वारा मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का शासकीय कर्मचारियों को सातवाँ वेतनमान दिये जाने, केन्द्रीय कर्मचारियों के समान महँगाई भत्ता, अध्यापक संवर्ग को शिक्षा विभाग में सम्मिलित करने तथा सेवानिवृत्ति की उम्र 62 वर्ष किये जाने पर आभार व्यक्त किया है।

मध्यप्रदेश शासकीय तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष  रमेशचन्द्र शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  ने सभी वर्गों का समान रूप से ध्यान रखा है और उनके हितों की रक्षा की है। मुख्यमंत्री द्वारा आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिये भी कारगर कदम उठाये गये हैं।

मध्यप्रदेश के गरीब श्रमिकों को सस्ती दर पर रोशनी का इंतजाम

 मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा कदम

मध्यप्रदेश के लाखों श्रमिक और बीपीएल वर्ग की जिंदगी में छाया अंधेरा अब दूर होने जा रहा है। पहले सौभाग्य योजना फिर अब सरल बिजली बिल और मुख्यमंत्री बकाया बिजली बिल माफी स्कीम में उन्हें सस्ती दर पर बिजली मुहैया करवाने के साथ बकाया बिजली बिल से भी मुक्ति दिलाई जा रही है। सौभाग्य योजना से अब तक जहाँ 17 लाख से अधिक घरों को बिजली कनेक्शन दिये गये, वही एक जुलाई से लागू दोनों नई योजनाओं ने पंजीकृत श्रमिकों और बिजली बिल के बकायादार बीपीएल श्रेणी के गरीबों की जिंदगी को रोशन कर दिया है।

सरल बिजली बिल स्कीम

सरल बिजली बिल स्कीम में मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना-2018 में पंजीकृत श्रमिक उपभोक्ताओं को घरेलू कनेक्शन के लिए प्रति माह 200 रुपये अथवा पिछले 12 माह का औसत जो भी कम हो, का बिल ही भरना होगा। बिल की शेष राशि राज्य सरकार सब्सिडी के रूप में भरेगी। स्कीम का लाभ 88 लाख श्रमिक उपभोक्ताओं को मिलेगा। श्रमिकों के हक में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उठाया गया यह सबसे बड़ा कदम है। स्कीम के लागू होने से अब श्रमिक की आय का एक बड़ा हिस्सा बिजली खर्च से बचेगा। बची हुई यह राशि उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई आदि में खर्च हो सकेगी। स्कीम का स्वरूप न सिर्फ व्यापक है बल्कि श्रमिकों का व्यापक हित भी इससे जुड़ा हुआ है, जिसके दूरगामी परिणाम सुखद होंगें। यह प्रावधान रखा गया है कि पंजीकृत श्रमिकों के परिवार की समग्र आई.डी. में दिखाये गये सदस्यों में से कोई भी उपभोक्ता होने पर वह लाभ का पात्र होगा। अगर उपभोक्ता चाहे तो नि:शुल्क नामांतरण भी करवा सकता है।

एक जुलाई से लागू इस स्कीम का बिल अगस्त में आयेगा। घर में बल्ब, पंखा एवं टी.वी चलाने के लिए प्रारंभिक रूप से बिलिंग खपत अधिकतम 100 यूनिट रखी जायेगी। स्कीम में लाभ के लिये मुख्यमंत्री संबल योजना में पंजीकृत श्रमिकों को आवेदन-पत्र विद्युत वितरण कंपनी के निकटतम कार्यालय/कैम्प में जमा करना होगा। स्व-घोषणा आवेदन-पत्र पर इस स्कीम का लाभ दिया जायेगा। लाभ श्रम विभाग में पंजीयन की वैधता जारी रहने तक उपलब्ध होगा। यदि कोई पात्र हितग्राही विद्युत उपभोक्ता अर्थात् जिस व्यक्ति के नाम बिजली कनेक्शन है के परिवार का सदस्य है और उपभोक्ता के साथ ही रहता है, तो ऐसे कनेक्शन पर भी स्कीम का लाभ दिया जायेगा। इसके लिए उपभोक्ता का नाम परिवर्तन आवश्यक नहीं होगा, परन्तु परिवार का सदस्य उन्हीं व्यक्तियों को माना जाएगा, जिनके नाम समग्र डाटाबेस में एक परिवार के रूप में अंकित हो। यदि किसी पात्र हितग्राही के निवास स्थान का बिजली कनेक्शन उसके नाम पर न होकर किसी अन्य के नाम पर है तथा पात्र हितग्राही उसे अपने नाम करवाना चाहता है, तो विद्युत कंपनी पूरी जानकारी देते हुए सहायता और मार्गदर्शन करेगी।

एयर कंडीशनर, हीटर का उपयोग करने वाले उपभोक्ता तथा 1000 वॉट से अधिक संयोजित भार वाले उपभोक्ता स्कीम के लिए अपात्र होंगे। जहाँ मीटर स्थापित हो, वहाँ मीटर से रीडिंग करते हुए बिल की गणना की जाएगी। विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 55 के प्रावधान के अनुसार नये कनेक्शन के लिए चरणबद्ध तरीके से मीटर की उपलब्धता के आधार पर मीटर स्थापित किये जायेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में 500 वॉट तक के संयोजित भार वाले अनमीटर्ड उपभोक्ताओं की विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2018-19 के टैरिफ आर्डर में निर्धारित श्रेणी एल.वी.1.2 की उप श्रेणी के अनमीटर्ड कनेक्शन के लिए लागू दर से बिलिंग की जाएगी। इसी क्रम में 500 वॉट से अधिक संयोजित भार वाले उपभोक्ताओं की आयोग के प्रचलित विनियम के अनुसार बिलिंग की जाएगी।

शहरी क्षेत्रों में स्थापित मीटर की रीडिंग जारी रहेगी एवं विद्युत नियामक आयोग के प्रचलित विनियम अनुसार बिल की गणना की जाएगी। विद्युत कंपनी आयोग द्वारा निर्धारित मानदण्ड के अतिरिक्त और कोई भी आंकलित यूनिट बिल में नहीं जोड़ेगी। उपभोक्ता के बिल में देय राशि तथा शासन द्वारा दी गई सब्सिडी का स्पष्ट उल्लेख रहेगा। प्रचलित दर से विद्युत शुल्क अधिरोपित किया जाएगा, जिसके सहित उपभोक्ता द्वारा मात्र 200 रुपये प्रतिमाह की राशि देय होगी। विद्यमान उपभोक्ता से अतिरिक्त सुरक्षा निधि नहीं ली जाएगी। नये कनेक्शन के लिए सौभाग्य योजना की तरह व्यवस्था रहेगी, जिसमें सुरक्षा निधि नहीं ली जायेंगी। उपभोक्ताओं को स्कीम का लाभ देने के लिए वितरण कंपनियों द्वारा वितरण केन्द्रवार, हाट/ बाजारों आदि में कैम्प लगाये जा रहे हैं। श्रमिक पंजीयन प्रमाण-पत्र की छायापति मांगने की जरूरत नहीं रहेगी।

मुख्यमंत्री बकाया बिजली बिल माफी स्कीम

स्कीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि न्यायालयीन अथवा चोरी के प्रकरणों के अलावा पूर्व में समाधान योजना का लाभ ले चुके उपभोक्ता भी पात्र होंगे। इसके अलावा यदि पंजीकृत श्रमिक के पास घरेलू बिजली कनेक्शन नहीं है तो उसे भी फ्री में कनेक्शन दिया जायेगा तथा कोई सुरक्षा-निधि नहीं ली जायेगी। एक जुलाई से लागू स्कीम में पंजीकृत श्रमिक और बीपीएल उपभोक्ताओं के 30 जून 2018 की स्थिति के बकाया लगभग 5200 करोड़ के घरेलू बिल माफ कर दिये गये हैं। इसका सीधा लाभ 77 लाख उपभोक्ताओं को मिला है। इसमें बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ता भी शामिल है।

स्कीम का उद्देश्य

घरेलू बिजली बिलों का भुगतान समय से नहीं कर पाने के कारण मूल बकाया राशि और उस पर अधिरोपित सरचार्ज के कारण उपभोक्ता के बिलों की राशि बहुत ज्यादा हो जाती है। मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना में पंजीकृत श्रमिकों और बीपीएल उपभोक्ताओं के घरेलू बिजली कनेक्शन की पुरानी बकाया राशि का निराकरण कर उन्हें नियमित बिल भुगतान करने के लिये प्रेरित करने के उद्देश्य से ही यह माफी स्कीम लागू की गई है। स्कीम का प्रभाव जून 2018 तक की कुल बकाया राशि पर लागू होगा।

पात्र उपभोक्ता

संबल योजना में पंजीकृत श्रमिक और बीपीएल उपभोक्ताओं के घरेलू कनेक्शन पर बिजली बिल की बकाया राशि को श्रम विभाग के पंजीयन अथवा बीपीएल कार्ड का क्रमांक उपलब्ध करवाने पर माफ किया जाएगा। ऐसे पंजीकृत श्रमिक जिनके निवास का बिजली कनेक्शन उसके स्वयं के नाम पर न होकर उसके परिवार के किसी सगे-संबंधी के नाम पर हो तथा बीपीएल उपभोक्ता को सरलता से नामांतरण की सुविधा देते हुए उपभोक्ता के साथ निवासरत होने की दशा में स्कीम का लाभ दिया जायेगा। यदि संबल योजना में पंजीकृत कोई पात्र हितग्राही-बिजली उपभोक्ता के परिवार का सदस्य है और उसके साथ रहता है, तो ऐसे कनेक्शन पर भी स्कीम का लाभ मिलेगा। इसके लिए उपभोक्ता का नाम बदलना जरूरी नहीं होगा, तथापि ऐसे प्रकरण में परिवार का सदस्य उन्हीं व्यक्तियों को माना जाएगा, जिनके नाम समग्र डाटाबेस में एक परिवार के रूप में अंकित हों।

स्कीम का स्वरूप

उपभोक्ता के जून, 2018 तक के बिल में देय मूल बकाया राशि और सम्पूर्ण सरचार्ज राशि माफ की जावेगी। इसके लिए आवेदन मिलने के बाद बकाया माफी प्रमाण-पत्र भी जारी किया जाएगा। सरचार्ज की पूरी रा‍शि एवं मूल बकाया राशि का 50 प्रतिशत वितरण कंपनी द्वारा माफ किया जायेगा तथा शेष 50 प्रतिशत राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। इसकी एवज् में राज्य शासन द्वारा तीन वर्ष अथवा 2018-19, 2019-20 एवं 2020-21 में सब्सिडी दी जायेगी। स्कीम में संबल योजना में पंजीकृत और बीपीएल श्रेणी के वे उपभोक्ता भी शामिल हो सकते हैं, जिन पर सामान्य बिजली बिल की राशि बकाया है और जिन्होंने बकाया राशि बाबत् न्यायालयीन प्रकरण दर्ज किया है और प्रकरण लंबित है। ऐसे उपभोक्ता जिन पर बिल की राशि बकाया होने से कनेक्शन स्थायी अथवा अस्थायी रूप से विच्छेदित किया गया था और जिन पर विद्युत अधिनियम की धारा 126, 135 या 138 में प्रकरण दर्ज हो और उनके बिल की राशि बकाया हो, ऐसे उपभोक्ताओं की निर्धारण अधिकारी द्वारा जारी निर्धारण आदेश की कंपाउडिंग फीस और देय ब्याज इत्यादि सहित पहले की बकाया समेत पूरी राशि माफ की जाएगी। पात्र हितग्राहियों के उपरोक्तानुसार निराकरण के बाद विशेष विद्युत न्यायालयों में दर्ज सभी प्रकरणों को समाप्त करने की कार्यवाही शुरू की जाएगी। पहले के वर्षो से जारी समाधान योजना में लाभ ले चुके घरेलू उपभोक्ता पात्रता के अनुसार इस स्कीम में फिर लाभ ले सकेंगे।

प्रदेश के मुखिया ने कहा कि जब तक किसानों की आय दोगुनी नहीं हो जाती तब तक हम चैन की साँस नहीं लेंगे

भोपाल-मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने उदयपुरा में 156 करोड़ की लागत की समूह पेयजल योजना का लोकार्पण किया। इस योजना से 107 गाँवों की डेढ़ लाख आबादी को शुद्ध पेयजल मिलेगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री  चौहान ने 88 करोड़ रूपए से अधिक राशि के 7 कार्यों का लोकार्पण तथा 83 करोड़ 61 लाख रूपए की राशि के 20 कार्यो का शिलान्यास भी किया।

कार्यक्रम की सबसे खास बात यह थी कि मुख्यमंत्री  चौहान ने नर्मदा नदी के किनारे बसे 39 शहरों में 944 करोड़ रूप्ए की पेयजल योजनाओं का ई-शिलान्यास भी किया। कार्यक्रम में जिले के एक लाख 46 हजार हितग्राहियों को विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के करीब 109 करोड़ रूपए के हितलाभ से लाभान्वित किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक किसानों की आय दोगुनी नहीं हो जाती तब तक हम चैन की साँस नहीं लेंगे।

अत्याधिक विपरीत मौसम और भारी वर्षा के बीच उदयपुरा पहुँचे मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि सरकार किसानों की बेहतरी के लिए हर कदम उठा रही है। पानी, बिजली, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। पहले मात्र साढ़े सात लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा थी जिसे बढ़ाकर 40 लाख हेक्टेयर कर दिया गया है। आगामी वर्षो में इसे 80 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पर एक लाख 80 हजार करोड़ की राशि खर्च की जाएगी।

एक वर्ष में किसानों के खाते में 30 हजार 362 करोड़ की राशि पहुँची

मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि पिछले एक वर्ष की अवधि में किसानों के खातों में भावांतर भुगतान योजना, कृषक समृद्धि योजना सहित अन्य किसान हितैषी योजनाओं में 30 हजार 362 करोड़ रूपए किसानों के खातों में जमा करवाये गये हैं। मुख्यमंत्री  चौहान ने केन्द्र सरकार द्वारा विभिन्न कृषि उपजों का समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि एक बार में समर्थन मूल्य की इतनी राशि एक साथ कभी नहीं बढ़ी है।

मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि असंगठित श्रमिकों के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री जन-कल्याण (संबल) योजना में पंजीकृत असंगठित श्रमिक को जमीन के पट्टे दिए जाएंगे। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना तथा मुख्यमंत्री आवास मिशन में घर बनाकर दिए जाएंगे। श्रमिकों के बच्चों को प्रथामिक से लेकर उच्चतम स्तर तक की शिक्षा निःशुल्क दी जायेगी। उन्होंने बताया कि संबल योजना के हितग्राहियों को आगामी 4 अगस्त से पूरे प्रदेश में एक साथ लाभान्वित करने का कार्य किया जाएगा।

संबल में पंजीकृत श्रमिक सरल बिजली योजना के पात्र

मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि गरीबों को संबल योजना में पंजीकृत श्रमिक सरल बिजली योजना के पात्र होंगे। उन्हें नया विद्युत कनेक्शन लेने के लिए अलग से कोई राशि नहीं देनी होगी। पात्र हितग्राहियों को मात्र 200 रूपए प्रतिमाह बिजली का बिल देना होगा जिसमें चार बल्ब, दो पंखे और एक टीवी चलाया जा सकेगा। पुराने बिजली के बिल माफ करने के लिए जुलाई और अगस्त के महीनों में शिविर लगाए जायेंगे। हितग्राहियों को जुलाई माह के बिल के अगस्त में भुगतान से योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

रेल मंत्री  पीयूष गोयल ने गांव तक नल-जल योजना के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री श्री चौहान को बधाई देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विकास का नया इतिहास रचा जा रहा है। जरूरतमंद लोगों को सरकार द्वारा बनाई गई योजनाओं का लाभ निश्चित तौर पर मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री  चौहान द्वारा उठाए गए कदम सराहनीय हैं।  गोयल ने कहा कि राज्य सरकार की भावांतर योजना तथा मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना ने किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुश्री कुसुम महदेले, लोक निर्माण मंत्री  रामपाल सिंह तथा सांसद  उदय प्रताप सिंह ने प्रदेश के विकास और आमजन के कल्याण के लिए चलाई जा रही अनेक योजनाओं का उल्लेख किया। कार्यक्रम में उदयपुरा विधायक  रामकिशन पटेल, गाडरवारा विधायक गोविन्द सिंह सहित अन्य जन-प्रतिनिधि तथा विभिन्न योजनाओं के हितग्राही उपस्थित थे।

 

अब बालिका सुरक्षा विषय को पाठ्यक्रम में शामिल किया जायेगा

 हिन्दू धर्म में बालिका को देवी का रूप माना गया है, वह पूजनीय है, उसके चरण धोकर माथे पर चढ़ाया जाता है

 भोपाल-मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान  इंदौर में एमवाय अस्पताल पहुँचे और मंदसौर की पीड़ित बालिका के संबंध में चिकित्सकों से जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि हिन्दू धर्म में बालिका को देवी का रूप माना गया है, वह पूजनीय है, उसके चरण धोकर माथे पर चढ़ाया जाता है। मगर समाज में कुछ दिग्भ्रमित लोग मानवता को शर्मशार कर रहे हैं। ऐसे नरपिशाचों को फाँसी की सजा दी जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि वे शुरू से ही दुष्कर्म पीड़ित बालिका के संबंध में एमवाय अस्पताल के अधीक्षक से प्रति-दिन व्यक्तिगत रूप से जानकारी हासिल कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि राज्य शासन बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिये कृत-संकल्पित हैं। बच्चियों के साथ बलात्कार के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर तीन माह के भीतर दोषी को सजा दिलाई जायेगी। उन्होंने कहा कि दुष्कर्मियों को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिलनी चाहिये। मुख्यमंत्री ने एमवाय अस्पताल में मीडिया से चर्चा के दौरान बताया कि दुष्कर्म पीड़ित बालिका के स्वास्थ्य, शिक्षा आदि का खर्च राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमारे समाज को बेटियों की सुरक्षा और इज्जत करनी चाहिये। राज्य शासन की मंशा है कि प्रदेश में बेटियाँ सुरक्षित रहें, पलें, बढ़ें और उन्नति करें। उन्होंने कहा कि बालिका सुरक्षा विषय को स्कूली पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जायेगा।

इस मौके पर जनसम्पर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र महापौर श्रीमती मालिनी गौड़, मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह, विधायक श्री महेन्द्र हार्डिया और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

दलालों के चक्कर में नहीं पड़ें, सभी के कार्ड बनेंगे

सभी पात्र लोगों को संबल योजना के कार्ड दिये जायेंगे

भोपाल- राजस्व, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री  उमाशंकर गुप्ता ने वार्ड-32 में मुख्यमंत्री जन-कल्याण योजना (संबल) में असंगठित श्रमिकों को पंजीयन प्रमाण-पत्र वितरित किये। उन्होंने कहा कि जल्द ही उन्हें स्मार्ट-कार्ड दिये जायेंगे। मंत्री गुप्ता ने कहा कि दलालों के चक्कर में नहीं पड़ें, सभी पात्र लोगों को संबल योजना के कार्ड दिये जायेंगे।

मंत्री गुप्ता ने कहा कि सरकार गरीबी हटाने के लिये कृत-संकल्पित है। प्रदेश में 6 करोड़ लोगों को एक रुपये किलो की दर से गेहूँ और चावल दिया जा रहा है। लाड़ली लक्ष्मी योजना में 28 लाख से अधिक कन्याओं को लाभान्वित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में कन्याओं के खाते में 25 हजार रुपये जमा करवाये जाते हैं।

मंत्री गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2022 तक सभी आवासहीनों को मकान देने का लक्ष्य है। उज्जवला योजना में पूरे देश में अभी तक 4 करोड़ परिवारों को नि:शुल्क घरेलू गैस कनेक्शन दिये जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि संबल योजना में पंजीकृत परिवार के बच्चों की पढ़ाई की पूरी फीस सरकार देगी। जैसे ही आप स्कूल में कार्ड दिखायेंगे, आपकी फीस माफ होगी और अस्पताल में कार्ड दिखायेंगे तो दवाइयाँ नि:शुल्क मिलेंगी। गर्भवती महिलाओं को 4000 रुपये और प्रसव के बाद 12 हजार रुपये दिये जायेंगे। इस मौके पर स्थानीय जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।

करीब 4 हजार करोड़ लागत की बीना सिंचाई परियोजना का शिलान्यास

सागर- जिले के खुरई में  करीब 4 हजार करोड़ लागत की बीना सिंचाई परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया इस परियोजना का लाभ मुख्यतः तीन क्षेत्रों सुरखी, खुरई और बीना को प्राप्त होगा। सुरखी क्षेत्र में 10 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाएगी। परियोजना में डाऊनस्ट्रीम खुरई से प्रारंभ होगी। चकरपुर बांध द्वारा प्राप्त जल बीना आएगा, बीना में लगभग 21 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित की जा सकेगी। बीना क्षेत्र के 65 गांव बीना नदी परियोजना से लाभान्वित होंगे, जिन्हें आगे चलकर बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। खुरई क्षेत्र में 50 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र सिंचित होगा। यहाँ की जमीन परियोजना के क्रियान्वयन से तीन फसली हो जाएगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार के पास पैसे की कमी मध्य प्रदेश के हिस्से का एक एक बूंद पानी मध्य प्रदेश को मिलना चाहए 12 साल में 40 लाख हेक्टेयर में की सिंचाई की  व्यवस्था की गई मुख्यमंत्री ने कहा खेती में दुनिया में मध्यप्रदेश नंबर 1 होगा में 19050 किसानों को 113 करोड़ भावांतर योजना में खाते में डाला है शिवराज सिंह ने कांग्रेस पर भी जमकर निशाना साधा शिवराज ने कहा कांग्रेस के नेता उन से कान में पूछते हैं कि अलादीन का चिराग लग गया तुम्हारे हाथ जो इतना खर्च कर रहे हो जितना भारतीय जनता पार्टी सरकार ने किसानों के लिए दिया है दुनिया में कोई सोच नहीं सकता गरीबी हटाना है तो उसके दो ही तरीके हैं जिनके पास ज्यादा हो उनसे थोड़ा लो और जिनके पास नहीं उनको बांट दो

शिवराज फार्मूला भारतीय जनता पार्टी का फारमूला नरेंद्र मोदी का फारमुला अमीर से टैक्स लेंगे गरीबों में बांट देंगे

25 लाख हेक्टेयर की सिंचाई परियोजना  बुंदेलखंड की धरती पर या तो काम कर रही है या स्वीकृत कर दी गई है

इस दौरान मुख्यमंत्री ने गरीबों से किया बच्चों को पढ़ाने का आव्हान मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटा बेटी के जन्म लेने के पहले ₹4000 तथा जन्म लेने के बाद ₹12000 खाते में डाला जाएगा  बिजली के बिल माफ करने की कहि बात   सरकार देगी गरीबों के बिजली बिल के पैसे 3 तारीख को लगेंगे बिजली के बिलों से गरीबों को मुक्त कराने शिविर मंदसौर कांड का किया जिक्र कहा बलात्कारियों को फांसी के फंदे पर लटकाना चाहिए गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह की उनके विधानसभा क्षेत्र खुरई में किए जा रहे कार्यों की मुख्यमंत्री ने की तारीफ

मंच पर शारदा कुशवाहा नामक हितग्राही मुख्यमंत्री के सामने रो पड़ी तो मुख्यमंत्री ने बंधाई ढांढ़स इस दौरान कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनसमूह के साथ साथ मंच पर  गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव सांसद लक्ष्मीनारायण यादव बीना विधायक महेश राय भाजापा जिला अध्यक्ष प्रभु दयाल पटेल सागर महापौर अभय दरे तथा अन्य भाजपा के पदाधिकारी  मौजूद रहे तो वहीं दूसरी ओर कुछ विधायकों की अनुपस्थिति जन चर्चा का विषय रही है

प्रदेश की एक लाख 11 हजार शालाओं में हुआ मूलभूत दक्षताओं का आकलन

बेसलाइन टेस्ट में शेष रहे बच्चों की दक्षता का आकलन 10 जुलाई तक जारी होगा 

दमोह -स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये 25 जून से बेसलाइन टेस्ट शुरू किया, जो 30 जून तक चला। बेसलाइन टेस्ट के माध्यम से प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में विद्यार्थियों में दक्षता का आकलन किया गया।

प्रदेश की लगभग एक लाख 11 हजार प्राथमिक और माध्यमिक सरकारी शालाओं में पढ़ने वाले 54 लाख बच्चों के बीच बेसलाइन टेस्ट किया गया। बेसलाइन टेस्ट के जरिये विद्यालयों में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर के आधार पर उनका समूह में वर्गीकरण किया गया। दूसरे चरण में बेसलाइन टेस्ट की डाटा एन्ट्री की जायेगी, जिससे जिला एवं राज्य-स्तर पर मूलभूत दक्षताओं की स्थिति का अवलोकन किया जायेगा।

बेसलाइन टेस्ट की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाये रखने के लिये विभागीय स्तर पर शाला मित्र, प्रधानाध्यापक और थर्ड पार्टी मॉनीटरिंग के रूप में प्रदेश के केन्द्रीय विद्यालय के स्टॉफ का भी सहयोग लिया गया। जिन बच्चों का बेसलाइन टेस्ट नहीं हो सका है, उनके लिये 10 जुलाई तक यह कार्य किया जायेगा।

बेसलाइन टेस्ट के विश्लेषण के बाद बच्चों की दक्षता बढ़ाने के लिये शैक्षणिक स्तर पर प्रयास किये जायेंगे। इस प्रक्रिया में हिन्दी भाषा और गणित की विशेष कक्षाएँ लगाई जायेंगी। प्रदेश में इस वर्ष बेसलाइन टेस्ट प्रक्रिया में वीडियो का भी उपयोग किया गया है। इसकी सूचना लिंक शिक्षकों को उनके मोबाइल पर दी गई। बेसलाइन टेस्ट में यू-ट्यूब का भी उपयोग किया गया।

राज्य शिक्षा केन्द्र ने बेसलाइन टेस्ट के आकलन और उसके विश्लेषण के लिये जिला शिक्षाधिकारियों और जिला समन्वयकों को निर्देश जारी किये हैं।

भूमि के डायवर्सजन के लिये अब किसी को भी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के न्यायालय से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी

भोपाल-भूमि के डायवर्सजन के लिये अब किसी को भी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के न्यायालय से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। अब भूमि स्वामी अपनी भूमि का विधि-सम्मत जैसा चाहे, डायवर्सन कर सकेगा। उसे केवल डायवर्सन के अनुसार भूमि उपयोग के लिये देय भू-राजस्व एवं प्रीमियम की राशि की स्वयं गणना कर राशि जमा करानी होगी और इसकी सूचना अनुविभागीय अधिकारी को देनी होगी। यह रसीद ही डायवर्सन का प्रमाण मानी जायेगी। अनुज्ञा लेने का प्रावधान अब समाप्त किया जा रहा है। राजस्व, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने यह जानकारी देते हुए बताया है कि इस संबंध में विधानसभा में मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक-2018 पारित किया जा चुका है।

भू-राजस्व संहिता में अब तक हुए 58 संशोधन

 गुप्ता ने बताया कि मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता-1959 में अब तक 58 संशोधन किये जा चुके हैं। इसके बाद भी जन-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिये जरूरी संशोधनों के सुझाव के लिये भूमि सुधार आयोग गठित किया गया था। आयोग के सुझावों के आधार पर भू-राजस्व संहिता में संशोधन किये गये हैं।

नामांतरण के बाद मिलेगी नि:शुल्क प्रति

नामांतरण का आदेश होने के बाद अब सभी संबंधित पक्षों को आदेश और सभी भू-अभिलेखों में दर्ज हो जाने के बाद उसकी नि:शुल्क प्रति दी जायेगी। यह प्रावधान भी किया गया है कि भूमि स्वामी जितनी चाहे, उतनी भूमि स्वयं के लिये रखकर शेष भूमि बाँट सकेगा।

आखिर क्यों प्रदेश सरकार बाघों की संख्या में वृद्धि की आस लगाये है ?

 दमोह-मध्यप्रदेश के लिये यह ऐतिहासिक क्षण है, जब नौरादेही अभयारण्य    में बाघ-बाघिन एक दूसरे के करीब हैं। इससे प्रदेश में बाघों की संख्या में वृद्धि होगी। नौरादेही अभयारण्य में विगत माहों में बाघ पुनर्स्थापना की गई थी। यहाँ के बाड़े में बाघिन को कान्हा टाइगर रिजर्व और बाघ को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से ला कर छोड़ा गया था। अब वन विभाग द्वारा जारी किये गये वीडियो से उम्मीद की जा रही है कि निश्चित ही मध्यप्रदेश में बाघों का कुनबा बढ़ेगा।

मध्यप्रदेश में निरंतर किये जा रहे प्रयासों से बाघों की संख्या बढ़ रही है। किशोर होते बाघों को वर्चस्व की लड़ाई और मानव द्वदं से बचाने के लिये वन विभाग ने अभिनव योजना अपनायी है। वन विभाग अनुकूल वातावरण का निर्माण कर बाघों को ऐसे अभयारण्यों में शिफ्ट कर रहा है, जहाँ वर्तमान में बाघ नहीं हैं। पन्ना में बाघ पुनर्स्थापना से विश्व में मिसाल कायम करने के बाद वन विभाग ने सीधी के संजय टाइगर रिजर्व में भी 6 बाघों का सफल स्थानांतरण किया है। बाघ शून्य हो चुके पन्ना में आज लगभग 30-35 बाघ हैं। अब नौरादेही अभयारण्य में बाघ पुनर्स्थापना का कार्य प्रगति पर है। मध्यप्रदेश केवल प्रदेश में ही नहीं देश में भी बाघों का कुनबा बढ़ा रहा है।

जबलपुर से 140 किलोमीटर दूर दमोह, सागर और नरसिंहपुर जिले में 1197 वर्ग किलोमीटर में फैले नौरादेही अभयारण्य में बहुत पहले कभी बाघ रहे होंगे। यह जंगल देश की दो बड़ी नदियों गंगा और नर्मदा का कछार होने के कारण यहाँ पानी की कमी नहीं है। वन विभाग ने पन्ना की तर्ज पर देश के सबसे बड़े इस अभयारण्य में बाघ आबाद करना शुरू किया है। पिछले 18 अप्रैल को यहाँ कान्हा से ढाई वर्षीय एक बाघिन और 29 अप्रैल को बाँधवगढ़ से लगभग पाँच वर्षीय बाघ का स्थानांतरण किया गया है।

5 जुलाई को ऑनलाइन लाटरी से मिलेगा निजी स्कूलों में प्रवेश

प्रदेश में शिक्षा का अधिकार कानून के तहत प्राइवेट स्कूलों की पहली कक्षा में निःशुल्क प्रवेश के लिये ऑनलाइन आवेदन 30 जून तक आमंत्रित किये गये हैं। पूर्व में यह तिथि 23 जून निर्धारित की गई थी। प्रदेश में अब तक लगभग 2 लाख 45 हज़ार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इस अवधि में सर्वर डाउन होने की वजह से स्कूल शिक्षा विभाग ने आवेदकों की सुविधा के लिये अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 जून कर दिया है।

प्राइवेट स्कूलों की पहली कक्षा में बच्चों के निःशुल्क प्रवेश के इच्छुक पालक बच्चों के आवेदन पत्र निर्धारित अंतिम तिथि 30 जून तक ऑनलाइन जमा करा सकते हैं। आर.टी.ई पोर्टल www.educationportal.mp.gov.in/RtePortal पर ऑनलाइन आवेदन पत्र का प्रारूप उपलब्ध करवाया गया है। इसके साथ ही, आवेदन पत्र संबंधित जन-शिक्षा केन्द्र, बी.आर.सी./बी.ई.ओ. कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा केन्द्र कार्यालय से निःशुल्क भी उपलब्ध करवाये जा रहे हैं।

आवेदन फार्म के साथ पात्रता संबंधी कोई भी एक दस्तावेज अपलोड करना आवश्यक होगा। आवेदक द्वारा पोर्टल से जनरेट प्रति को अपने पास सुरक्षित रखा जायेगा। ऑनलाईन आवेदन करने में कोई समस्या अथवा कठिनाई होने की स्थिति में संबंधित विकासखंड के बीआरसी कार्यालय में स्थापित सुविधा डेस्क की सहायता ली जा सकती है। पोर्टल पर पंजीकृत एवं लॉक किये गये आवेदनों को ही लॉटरी प्रक्रिया में सम्मिलित किया जायेगा।

ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से 5 जुलाई को पारदर्शी तरीके से छात्रो को उनकी पंसद के प्राइवेट स्कूलों में सीट का आवंटन किया जायेगा। लॉटरी प्रक्रिया के बाद आवंटित सीट की जानकारी की सूचना आवेदक को उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से दी जायेगी। आवंटन की सूची एजुकेशन पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेगी।

आवेदन फार्म प्राप्त करने अथवा जमा करने में कोई दिक्कत होने अथवा उन स्कूलों की जानकारी चाहिए हों, जहां सीटें खाली हैं, तो आर.टी.ई. पोर्टल, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सर्व शिक्षा अभियान के ज़िला परियोजना कार्यालय अथवा विकासखण्ड स्रोत केन्द्र कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।